कैरी बैग के पैसे वसूलने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाकर चंडीगढ़ कंज्यूमर फोरम ने देश में मिसाल कायम कर दी है। वी मार्ट और शॉपरस्टॉप के खिलाफ कंज्यूमर फोरम में केस चल रहा है। वहीं, आदेश आने से पहले ही कंपनियों ने कैरी बैग के पैसे चार्ज करना बंद कर दिया है और फोरम में आकर जवाब सौंपा कि अब वह कैरी बैग के पैसे नहीं ले रही हैं।
शॉपरस्टॉप ने कहा है कि अखबारों में फोरम के आदेशों की खबर पढ़ने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि यह ठीक नहीं है, जिसके बाद उन्होंने कैरी बैग के पैसे चार्ज करना बंद कर दिया है। वी मार्ट ने भी एक एफिडेविट दायर कर कहा कि वह भी अब कैरी बैग के पैसे नहीं लेते हैं। इसके बाद कंज्यूमर फोरम ने दोनों पर लगने वाला जुर्माना माफ कर दिया।
साथ ही उनकी तारीफ की और कहा कि यह अच्छा है कि कंपनियां बाकियों की गलती से सीख ले रही हैं और अन्य को भी अब अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। फोरम ने कहा कि कोई भी ग्राहक अगर सामान खरीदता है तो वह उसे हाथ में नहीं ले जा सकता। ऐसे में कंपनियों को उनकी मजबूरी का फायदा नहीं उठाना चाहिए।
बीते दिनों चंडीगढ़ स्टेट कमीशन ने वेस्टसाइड रिटेल स्टोर की अपील को खारिज करते यह तक कह दिया था कि कैरी बैग के पैसे चार्ज करना कंपनियों के लिए कमाई का जरिया बन गया है। बड़े रिटेल स्टोर ग्राहकों को लुभाने के लिए 60 से 70 फीसदी तक डिस्काउंट ऑफर करते हैं, क्या वे 10 रुपये का कैरी बैग मुफ्त में नहीं दे सकते।
बाटा और डोमिनॉज के खिलाफ दिए आदेशों ने मचाई खलबली
चंडीगढ़ के उपभोक्ता फोरम ने लाइफस्टाइल, वेस्टसाइड, बाटा और डोमिनॉज के खिलाफ आदेश जारी कर ग्राहकों को मुफ्त में कैरी बैग देने के आदेश दिए हैं। साथ ही इन कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया था। बीते दिनों बाटा और डोमिनॉज के खिलाफ आए आदेशों ने पूरे देश में खलबली मचा दी और लोगों को अपने अधिकार के प्रति जागरूक किया। इन कंपनियों ने फोरम के आदेशों को स्टेट कमीशन में भी चुनौती दी, लेकिन वहां भी इन्हें फटकार ही मिली।
कैरी बैग प्रचार का जरिया
कैरी बैग के एवज में पैसे वसूलना बड़े-बड़े शोरूम व दुकानों के लिए कमाई का जरिया है। इन कैरी बैग की कीमत 2 रुपये से लेकर 10, 15 और कभी 25 रुपये तक होती है। जो बैग के साइज और मटेरियल (मसलन पेपर का बना है, या जूट या फिर कपड़े का) पर भी निर्भर करता है।
गौर करनेवाली बात यह भी है कि जिन कैरी बैग के हम पैसे देते हैं, उन पर कंपनी या दुकान का नाम लिखा होता है। यानी ये उनके प्रचार का एक तरीका भी है। ऐसे में ये ग्राहकों का दोहरा हनन है। एक तो ग्राहक उस कैरी बैग के पैसे चुका रहा, जो उसका हक है। दूसरा ये कि ग्राहकों की बगैर जानकारी में आए कंपनी अपना प्रचार भी कर रही है।
कंपनी का लोगो प्रिंट न हो, तब भी नहीं चार्ज कर सकते पैसे
अगर कैरी बैग सादा हो तो भी कंपनी उसके लिए पैसे नहीं ले सकती है। फोरम ने साफ कहा था कि सामान को हाथ में नहीं ले जा सकते, उसे कैरी बैग मुहैया कराना स्टोर की जिम्मेदारी है। वह चाहे प्रिंटेड बैग दें या सादा। बाटा के मामले में फोरम ने अपने आदेशों में कहा था कि कंपनियां उपभोक्ताओं को अपने प्रचार के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। यह धोखा के साथ अन्याय है।
कैरी बैग लेने पर अब तक इन कंपनियों पर लग चुका है जुर्माना
डोमिनॉज - 5 लाख
लाइफस्टाइल - 13 हजार
वेस्टसाइड - 13 हजार
डोमिनॉज - 10,500
बाटा - 11 हजार
इन कंपनियों के खिलाफ चल रहा फोरम में केस
बिग बाजार, ईजी डे क्लब, रिलायंस ट्रेंड्स, सेंट्रल, पैंटालून्स, डी-मार्ट, ट्वेंटी फोर सेवेन
(अगर यह कंपनियां कैरीबैग के पैसे चार्ज करना बंद कर फोरम में एफिडेविट देतीं हैं कि उन्होंने कैरीबैग के पैसे लेना बंद कर दिया है तो फोरम उनका जुर्माना माफ कर सकता है।)
कहां करें केस
राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
प्लॉट नंबर-5बी, सेक्टर-19बी, चंडीगढ़
ऐसे करें शिकायत
- नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन 1800-11-4000 या 0172-2700183 पर कॉल कर सकते हैं।
- वेबसाइट द्धह्लह्लश्चऱ्//222.ठ्ठड्डह्लद्बशठ्ठड्डद्यष्शठ्ठह्यह्वद्वद्गह्म्द्धद्गद्यश्चद्यद्बठ्ठद्ग.द्बठ्ठ/ पर लॉगइन करके भी कंप्लेंट रजिस्टर कॉलम में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- जिले के उपभोक्ता फोरम में जाकर लिखित शिकायत कर सकते हैं।
- सेक्टर-19 स्थित फोरम में एक सेंट्रलाइज्ड शिकायत केंद्र बनाया गया है, जहां पर केस फाइल करने संबंधी कोई भी जाकर हर तरह की जानकारी ले सकता है।
ऐसे दें लिखित शिकायत
एक सादे कागज पर निर्धारित शुल्क के साथ खुद या वकील के जरिए फोरम में तीन कॉपी के सेट में शिकायत दाखिल कर सकते हैं। शिकायतकर्ता व विपक्षी का नाम, पता, शिकायत का कारण कब पैदा हुआ और मांगी गई क्षतिपूर्ति का विवरण भी प्रमाण के साथ देना जरूरी है। फोरम के पक्ष में पोस्टल ऑर्डर या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए डिस्प्यूट फीस जमा होगी।
केस दर्ज करने से पहले इनका रखें ख्याल
- केस करने से पहले कैरी बैग की रसीद लेनी होगी।
- रसीद और शिकायत की कॉपी उपभोक्ता फोरम में दें। आप खुद भी अपना केस लड़ सकते है या वकील भी कर सकते हैं।
- 5 लाख रुपये तक के विवाद में आपको कोई फीस नहीं देनी होगी।
- 5 लाख से 10 लाख रुपये के विवाद में 200 रुपये फीस लगती है।
- 10 लाख से 20 लाख रुपए के विवाद में 400 रुपये फीस।
कोई भी स्टोर संचालक ग्राहकों से कैरी बैग की एवज में राशि नहीं ले सकता। खरीदारी करने के बाद कैरी बैग लेना ग्राहक का अधिकार है। फोरम के आदेश नजीर साबित होंगे, अब कंपनियों को खुद आगे आकर कोर्ट में कहना चाहिए कि वह कैरीबैग के पैसे चार्ज नहीं करतें।
- पंकज चांदगोठिया, उपभोक्ता मामलों के वकील