इसके बाद 2 अक्तूबर 2018 को मनेठी निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण धरने पर बैठ गए थे। 127 दिन चले धरने व लोकसभा चुनाव को देखते हुए एम्स निर्माण को फरवरी में आए अंतरिम बजट में शामिल कर लिया गया था। लेकिन अब एक बार फिर से अड़चन खड़ी हो गई थी।
अरावली में निर्माण की अनुमति मिली तो पहला होगा केस
वन विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि विभाग की ओर से शुरुआती समय ही अरावली लैंड बताकर निर्माण नहीं होने की रिपोर्ट दी थी। इस तरह के मामले पहले भी सुप्रीम कोर्ट में जा चुके हैं। लेकिन सरकार ने अरावली मे निर्माण की अनुमति नहीं दी। बता दें कि प्रदेश के 6 जिलों में अरावली प्लांटेशन स्कीम के तहत पंचायती मिल्कियत की जमीन है। कहीं पर भी निर्माण की मंजूरी नहीं मिल पाई है।
पूर्व निर्धारित साइट की अड़चनों को दूर करने के प्रयास: डीसी
डीसी यशेंद्र सिंह ने कहा कि आज संबधित विभागों के सभी अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। जमीन के पूरे रिकॉड की जांच की गई है। इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है। सोमवार तक रिपोर्ट आने की उम्मीद है। हमारा प्रयास पूर्व निर्धारित साइट पर आई अड़चनों को दूर करने का है। इस पर हम काम कर रहे हैं।