पंजाब किसान भवन में करीब 30 साल तक पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल की सुरक्षा में तैनात राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) कमांडो ठहरे । ऐसे में इनके ठहराने का किराया करीब पौने पांच करोड़ बनता है। कई साल से पंजाब मंडी बोर्ड किराये की वसूली के लिए संघर्ष कर रहा है। वहीं, आर्थिक हालात खराब होने के चलते मंडी बोर्ड ने इस मामले में सीएम को पत्र लिखा है। उन्होंने सीएम से डीजीपी ऑफिस से किराये की रकम दिलाने की गुहार लगाई है।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की सुरक्षा में तैनात एनएसजी कमांडो को ठहराने के लिए पंजाब पुलिस ने 1992 में मंडी बोर्ड को पत्र लिखकर गुहार लगाई थी। उस समय 34 बेड और एक डीलक्स कमरा मुहैया करवाने की बात कही थी। कमांडो द्वारा उक्त जगह का दिसंबर 1992 से अक्तूबर 2021 तक इस्तेमाल किया था। इस समय अवधि का किराया 4.71 करोड़ रुपये बनता है।
मंडी बोर्ड काफी समय से किराये की वसूली के लिए संघर्ष कर रहा है। 2001 में इस मामले को लेकर मुख्य सचिव ने मंडी बोर्ड के अधिकारियों से मीटिंग भी की थी। दिसंबर 2005 में बोर्ड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की अहम मीटिंग हुई थी। इसमें कमांडो से कमरा खाली करवाने और किराया वसूलने को लेकर फैसला लिया गया।
2006 में मंडी बोर्ड ने डीजीपी को पत्र लिखा था। इसके बाद पंजाब पुलिस ने न तो किराये की अदायगी की और न ही कमांडो से कमरा खाली करवाया। किराये को लेकर ऑडिट पैरा भी आया है। अब किराया वसूलने के लिए मंडी बोर्ड ने मुख्यमंत्री से दखल देने की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक किराये की अदायगी हो जाती है तो मंडी बोर्ड को काफी राहत मिलेगी।
दो दिन के लिए मांगी थी इजाजत
सूत्रों की माने तो पंजाब पुलिस की तरफ से जब ये कमांडो पंजाब आए थे तो मंडी बोर्ड को केवल दो दिन के लिए इनके इंतजाम करने की बात कहीं थी। इसके बाद ये कमांडो पक्का डेरा लगाकर बैठ गए थे। इस वजह से वहां पर आने वाले किसानों को भी दिक्कत आ रही थी। वहीं, इससे किसान भवन को होने वाली आमदनी को भी नुकसान पहुंचा था। वहीं, कोरोना काल में किसान भवन का नवीनीकरण किया गया है। ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा तक शुरू हो गई। हर महीने किराये से मंडी बोर्ड को आमदनी हो रही है।