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हाथिनी 'माया' से मिलना है तो छतबीड़ जू आइए

Sat, 21 Jun 2014 03:01 PM IST
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
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राजमंगल बाड़े में आता तो हंगामा मचाता है। ‘माया’ की माया भी उस पर बेअसर है और हेमा की अदाएं भी उसे नहीं रोक पातीं। यह राजमंगल है छतबीड़ का सबसे खतरनाक हाथी।
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पचास साल के राजमंगल के साथ यहां चार हथिनी हैं - राजकली (वृद्ध), पार्वती, माया और हेमा। राजमंगल को छतबीड़ जू में लाकर अनुशासन में रखने की लाख कोशिशें कीं पर कामयाब नहीं हो पाईं। बाड़े में लाने पर वह चिंघाड़ता है और उठापटक करता है।

पसंदीदा डाइट न मिले तो आता है गुस्सा:
राजमंगल का गुस्सा उस समय उफान पर होता है जब उसको पसंदीदा डाइट न मिले। वह ढाई क्विंटल तो चारा खा जाता है और उसके साथ दस किलो डाइट खाता है। इस डाइट में मक्की, बाजरा, जौ और गेहूं के साथ भीगे चने और केले होते हैं। वह लहसुन और अदरक का भी शौकीन है।
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शूट एट साइट का था आदेश:
राजमंगल 1997 में रोहतक से छतबीड़ चिड़ियाघर में लाया गया था। छतबीड़ जू के एक अधिकारी ने बताया कि वह खतरनाक था और रोहतक में आतंक का पर्याय बन गया था। उसे मारने के आदेश दिए गए थे। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के दखल के बाद यह आदेश वापस लिए गए और उसे छतबीड़ जू में लाया गया।

वीरू की मौत के बाद हुआ खूंखार:
राजमंगल और हेमा के बीच संबंध से उन दोनों के एक बेटा हुआ था। जिसका नाम वीरू रखा गया था। चार साल पहले वीरू को चारे में बैठे सांप ने काट लिया था जिससे उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत के बाद राजमंगल ज्यादा खूंखार हो गया।

आंकड़े
हाथी-एक
हथिनी-चार
डाइट-ढाई क्विंटल चारा और न्यूट्रीशियन डाइट

सात चिड़ियाघर में से एक है छतबीड़
छतबीड़ जू उन सात चिड़ियाघरों में से एक है जिसमें हाथी देखने को मिलते रहेंगे। सेंट्रल जू अथॉरिटी के आदेश के अनुसार देश के किसी भी चिड़ियाघर में हाथी नहीं रखे जाएंगे क्योंकि वहां उन्हें लोहे की जंजीरों से बांध कर रखा जाता है। इससे वे घायल हो जाते हैं और इनकी देखभाल भी उचित ढंग से नहीं हो पाती। चिड़ियाघरों ने इस आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल की थी और बाद में सात चिड़ियाघरों को नियम और शर्त के अनुसार हाथी रखने की अनुमति मिली थी। उसमें से एक छतबीड़ है।
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राजमंगल बिगड़ैल है इसी को देखते हुए उसके लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। इसको महावत तब बाड़े में लाते हैं, जब शांत वह होता है।
डॉ. मनीष कुमार, फील्ड डायरेक्टर, छतबीड़ जू
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