पिता की बटालियन ही ज्वाइन करने की रखी थी शर्त
भाई संदीप सिंह ने बताया कि सेना में ज्वाइनिंग के वक्त जब उनसे पूछा गया कि वह किस बटालियन से जुड़ेंगे तो उन्होंने कहा था कि वह अपने दादा शीतल सिंह और पिता लखमीर सिंह वाली बटालियन 12 सिख लाइट इन्फैट्री को ही ज्वाइन करेंगे। उन्हें यह देखकर अच्छा लगेगा कि जिस बटालियन में उनके पिता और दादा अफसरों को सैल्यूट मारते थे, वहां के सैनिक उन्हें सैल्यूट करेंगे।
सबसे पहले चचेरे भाई को मिली बलिदान की खबर
कर्नल मनप्रीत के चचेरे भाई कमलजीत सिंह ने बताया कि बुधवार शाम करीब पौने छह बजे उनके स्मार्टवॉच पर एक नोटिफिकेशन आई। चेक किया तो भाई के बलिदान होने की खबर थी। संदेश पढ़कर उनकी आंखों के अंधेरा छा गया। खबर को झूठा मानकर चेक करना शुरू किया और मनप्रीत के छोटे भाई संदीप को फोन कर जानकारी दी। इस दौरान भाई का नंबर लगाने की कोशिश की लेकिन नंबर नहीं लग रहा था। इसके बाद सेना के अफसरों से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन संपर्क नहीं हो सका। करीब दो घंटे बाद टीवी पर भाई के शहीद होने की खबर आने लगी। इसके बाद गांव में मातम पसर गया।