पंजाब में कोयला संकट और गंभीर हो गया है, जिसके कारण दोनों सरकारी थर्मल प्लांट पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अब पावरकॉम जहां प्राइवेट थर्मल प्लांटों पर निर्भर है, वहीं बाहर से महंगी बिजली भी खरीद रहा है। रविवार को थर्मल प्लांटों में मात्र आधे दिन से लेकर ढाई दिन का कोयला शेष रह गया, जबकि तय गाइडलाइंस के मुताबिक प्लांटों में कोयला 25 से 30 दिन का होना चाहिए।
प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक रविवार को सरकारी थर्मल प्लांट रोपड़ में डेढ़ दिन से भी कम, लहरा मुहब्बत में आधा दिन, तलवंडी साबो में ढाई दिन, राजपुरा में भी ढाई दिन और गोइंदवाल में आधे दिन से भी कम का कोयला बचा था। इस गंभीर संकट को देखते हुए पावरकॉम ने अपने दोनों थर्मलों रोपड़ व लहरा मुहब्बत को पूरी तरह से बंद कर दिया। इन थर्मल प्लांट के आठ यूनिट हैं, जिनसे करीब 1760 मेगावाट बिजली मिलती है।
उधर, गोइंदवाल का एक यूनिट बंद होने से पावरकॉम को मिलने वाली करीब 250 मेगावाट बिजली की कटौती हो गई। तलवंडी साबो के 660-660 मेगावाट के तीनों यूनिट आधी क्षमता पर चलाए जाने से केवल 941 मेगावाट के करीब बिजली मिली, जबकि इन यूनिटों से 1980 मेगावाट बिजली मिल सकती है। बिजली सप्लाई में इस बड़ी कटौती के कारण पावरकॉम को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ी। हालांकि रविवार को बारिश के कारण बिजली की मांग में कमी से पावरकॉम के लिए कुछ राहत रही, लेकिन फिर भी कोयला संकट ने पावरकॉम के लिए बिजली की मांग को पूरा करना एक बड़ी मुसीबत बना दिया है।
रविवार को पावरकॉम को प्राइवेट थर्मलों से 2280 मेगावाट, हाइडलों से 403 मेगावाट, सोलर प्रोजेक्टों से 57 मेगावाट बिजली मिली, जो कुल 2741 मेगावाट रही। बारिश के कारण रविवार को पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 7494 मेगावाट दर्ज की गई। पिछले दिनों मांग 9000 मेगावाट पार कर गई थी। रविवार को दर्ज मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम ने बाहर से 4700 मेगावाट से ज्यादा बिजली ली। रविवार को कटों से राहत रही।
उम्मीद है कि इस महीने के अंदर कोयले की निर्विध्न सप्लाई शुरू हो जाएगी। आज मांग में कमी के चलते कटों से निजात रही है।
- ए वेणु प्रसाद, सीएमडी, पावरकॉम