बरोदा उपचुनाव के बाद गठबंधन सरकार में सियासत शुरू हो गई है। अंदरखाते भाजपा नेता जजपा (जननायक जनता पार्टी) नेताओं से बरोदा उपचुनाव में हासिल किए गए वोटों का ब्योरा जानना चाह रहे हैं। गठबंधन के सहारे बरोदा का रण जीतने की तैयारी करे बैठी भाजपा को यहां जजपा का पूरा वोट नहीं मिला। इस बात को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी मीडिया के सामने स्वीकार लिया है।
यहां हरियाणा निवास में पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने साफ कह दिया कि जजपा का पूरा वोट हासिल होता तो हमारे प्रत्याशी को 70 से 75 हजार तक बढ़त मिलती। हां बरोदा उपचुनाव में जजपा के साथ गठबंधन का कुछ लाभ जरूर मिला है। मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी की वकालत करते हुए कहा कि हम यह चुनाव हार कर भी जीते हैं। इस बार हमारी पार्टी को 50 हजार से अधिक वोट मिले हैं।
यह सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट थी, इस वजह से कांग्रेस की झोली में गई है। बरोदा उपचुनाव के बाद हमारी पार्टी पूरे उत्साह में है। हमारा जो वोट प्रतिशत बढ़ा है, वह विकास के कारण ही बढ़ा है। इस दौरान उन्होंने ध्रुवीकरण की बात भी स्वीकारी। उन्होंने कहा कि बिहार के साथ अन्य राज्यों में भी भाजपा को बढ़त मिली है।
उधर, कृषि मंत्री जेपी दलाल ने भी कहा कि वोटों का ध्रुवीकरण हुआ है। हमारी पार्टी को पिछली बार से अधिक वोट मिले हैं। यहां पर सीधा मुकाबला कांग्रेस के साथ था। कांग्रेस ने एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और मंडियों को लेकर भ्रामक प्रचार किया। इस इलाके में हमारा भाजपा का प्रत्याशी कभी नहीं जीता है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का व्यक्तिगत संपर्क अधिक होने का लाभ कांग्रेस को मिला है।