सभी विधायक उन बिलों का गहन अध्ययन करें और यह तय करें कि संबंधित बिल पर सदन में किन तथ्यों के साथ बोलना है। उसके बाद जब सदन पटल पर ये बिल रखा जाए तो विधायक उस पर सकारात्मक व प्रभावशाली रूप से बहस करें, उसके बाद ही सहमति के साथ उन बिलों को पास किया जाए। सीएम का मानना है कि इस व्यवस्था से बिल लाने का मकसद भी पूरा होगा और आमजन को भी इसका लाभ मिल पाएगा। सीएम की इस बात का सदन में सभी विधायकों ने ध्वनि मत के साथ स्वागत किया।
पांच दिन पहले विधानसभा अध्यक्ष के पास पहुंचेगा बिल, तभी होगी चर्चा
इसके अलावा विधानसभा में पेश होने वाले नए बिलों व संशोधन विधेयकों पर अब तभी चर्चा होगी, जब संबंधित बिल कम से कम पांच दिन पहले विधानसभा अध्यक्ष के पास पहुंच जाए। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता भी अपने स्तर पर विधानसभा में इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी कर रहे हैं।
इसका मकसद है कि बिलों को पारित करने से पहले उस पर प्रभावशाली चर्चा हो और उस संदर्भ में अच्छे सुझाव आएं, ताकि बिल लाने का उद्देश्य सार्थक हो सके। अभी विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा अध्यक्ष के पास सदन में पेश होने वाले नए बिलों व संशोधन विधेयकों की सिर्फ सूची ही आती है, उसकी विस्तृत जानकारी नहीं। मगर अब इस प्रथा को बदला जाएगा।
व्यंग्य करें, निडर रहें, सच बोलें, मगर किसी का मन न दुखाएं
सीएम मनोहर लाल ने सभी विधायकों को ट्रेनिंग सेशन के दौरान बताया कि सदन में निडर रहें, सदैव सच बोले, झूठ बोलकर गुमराह करने का पाप कतई न करें। किसी बात पर व्यंग्य कसें, तो मर्यादा को ध्यान में रखकर। सकारात्मक व्यंग्य से माहौल भी हलका बनता है। लेकिन ध्यान रहे किसी का उपहास न उड़ाएं, किसी का मन न दुखाएं, किसी को पीड़ा न दें। अपनी बात रखते हुए एक अनुभवी विधायक होने का उदाहरण पेश करें और इस बात का ध्यान रखें कि हजारों लोगों ने उन्हें चुनकर इस सदन में भेजा है।
शुरू हो सकती है ‘बेस्ट एमएलए ऑफ द ईयर’ की परंपरा
हरियाणा विधानसभा में एक नई परंपरा शुरू हो सकती है। जिसके अंतर्गत हर साल विधायकों की कार्यप्रणाली, उनके व्यवहार, उनके मुद्दे रखने के अंदाज इत्यादि पर निगरानी रखते हुए सदन ‘बेस्ट एमएलए ऑफ द ईयर’ घोषित कर सकता है। सीएम ने यह सुझाव विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता को दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने भी सीएम को आश्वस्त किया है, उनके सुझाव पर सकारात्मक विचार कर फैसला लिया जाएगा।