कंवर पाल ने बताया कि चारों कक्षाओं की पुस्तकों को पुस्तकालयों अथवा बुक-बैंक के माध्यम से विद्यार्थियों को दिया जाएगा, जो विद्यार्थी पास-आऊट करके अगली कक्षा में प्रमोट हो जाएगा तो वह पिछली कक्षा की पुस्तकों को पुस्तकालय में जमा करवा देगा और अगली कक्षा की पुस्तकों को पुस्तकालय से इशू करवा लेगा।
इस प्रकार हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग को इस व्यवस्था पर एक बार ही ज्यादा खर्च करना पड़ेगा, बाद में प्रतिवर्ष मात्र 10 से 20 प्रतिशत ही खर्च होगा। हरियाणा सरकार के इस निर्णय से जहां विद्यार्थियों के अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा वहीं पुस्तकें बार-बार प्रयोग करने से पेड़ों की कटाई कम होगी और पर्यावरण के लिए यह व्यवस्था मददगार साबित होगी।
साथ ही बताया कि नूंह जिला को केंद्र सरकार द्वारा पहले ही एसपीरेशनल-डिस्ट्रीक्ट घोषित किया हुआ है, जिसके तहत बच्चों का ड्राप-आऊट रोकने के लिए निशुल्क पुस्तकों की व्यवस्था के लिए पहले ही 2 करोड़ रूपए की राशि जारी की जा चुकी है।
हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम के तहत बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए कई कार्य किए जा रहे हैं। छात्राओं को उसके शैक्षणिक संस्थान तक परिवहन सुविधा, स्कूलों में अलग से शौचालय की व्यवस्था की गई है तथा उनमें नेतृत्व क्षमता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।