हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सुझाव दिया है कि विधानसभाओं और संसद की कार्यवाही की तरह ही उच्च न्यायालयों की न्यायिक कार्यवाही का भी वैबकॉस्ट अथवा सीधा प्रसारण किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री रविवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की एक कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे कानूनी ज्ञान के प्रचार-प्रसार और देश की न्यायिक व्यवस्था में विश्वास को बढ़ाने को मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाने चाहिए कि उच्च न्यायालयों की कार्यवाही हिन्दी या प्रदेश की क्षेत्रीय भाषा में करने की अनुमति भी दी जाए। किसी भी प्रकार के संदेह को दूर करने के लिए उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने तक निर्णय अंग्रेजी में लिखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ छिटपुट अपराधों को अपराध संहिता से मुक्त किए जाने की आवश्यकता है।
ऐसे अपराधों में संलिप्त लोगों के सुधार के लिए समाज सेवा की एक वैकल्पिक प्रणाली विकसित की जानी चाहिए, इसमें एक लंबी परिवीक्षा अवधि के साथ एक निश्चित समयवधि के लिए गली की सफाई जैसी सजाएं शामिल की जा सकती हैं और इस परिवीक्षा अवधि के दौरान वही अपराध पुन: होने पर जेल की सजा दी जा सकती है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की सभी के लिए त्वरित न्याय के मिशन की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी राज्य कानूनों एवं नियमों पर विचार करने और अप्रचलित कानून, जो आज के समय में प्रासंगिक नहीं हैं, को निरस्त करने की सिफारिश ही नहीं, बल्कि आज की वास्तविकताओं को बेहतर रूप से प्रतिबिंबित करने के लिए अन्य अधिनियमों एवं नियमों में संशोधन करने की सिफारिश करने के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) इकबाल सिंह की अध्यक्षता में हरियाणा संविधि समीक्षा समिति का गठन किया है।
अलग हाईकोर्ट और डिवीजन बेंच की मांग: खट्टर ने केंद्र सरकार से आह्वान किया कि हरियाणा से संबंधित कुछ विशेष मुद्दों पर विचार किया जाए। इनमें अलग उच्च न्यायालय की मांग, उच्च न्यायालय में बराबर की हिस्सेदारी, अलग से डिवीजन बेंच का सृजन और अखिल भारतीय न्यायिक सेवाओं के मुद्दे का सृजन शामिल हैं।
हाईकोर्ट में हरियाणा को कम मिला प्रतिनिधित्व: सीएम खट्टर ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में हरियाणा को बराबर से कम प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में पंजाब से 60 प्रतिशत न्यायाधीश और हरियाणा से 40 प्रतिशत न्यायाधीश लेने के एक अलिखित नियम का अनुपालन किया जा रहा है। यह प्रथा भेदभावपूर्ण ही नहीं बल्कि कानून सम्मत भी नहीं है। मुख्यमंत्री ने भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश और पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से इस भेदभावपूर्ण परंपरा और प्रथा को समाप्त करने का आग्रह किया।