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Punjab: सीएम मान ने रखा सारागढ़ी जंग की स्मारक का नींव पत्थर, निर्माण कार्य छह माह में पूरा करने का एलान

Tue, 12 Sep 2023 10:14 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेसी, फिरोजपुर (पंजाब)

सार

भगवंत मान ने कहा कि पिछली सरकार ने यह स्मारक बनाने का एलान किया था और साल 2019 में एक करोड़ रुपये जारी किये थे। सीएम मान ने कहा कि यह कितने दुख की बात है कि इस स्मारक का काम कभी भी शुरू नहीं हुआ, क्योंकि इसके लिए 25 लाख रुपये की और जरूरत थी।
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पंजाब के सीएम भगवंत मान। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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पंजाब के सीएम भगवंत मान ने मंगलवार को फिरोजपुर में सारागढ़ी की ऐतिहासिक जंग के दौरान शहादत प्राप्त करने वाले 21 सिख शूरवीरों की याद में बनने वाले स्मारक का निर्माण कार्य छह महीनों में मुकम्मल करने का एलान किया। मंगलवार को यहां सारागढ़ी जंग की स्मारक का नींव पत्थर रखने के बाद सीएम ने कहा कि इस स्मारक के निर्माण के लिए फंड की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। 

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उन्होंने कहा कि सारागढ़ी जंग के दौरान सैनिकों की शौर्यगाथा और बलिदान हमारी आने वाली पीढ़ियों को देश की निस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। देश की प्रभुसत्ता की रक्षा के दौरान दुश्मन के साथ टक्कर लेते हुए शहादत प्राप्त करने वाले 21 बहादुर सैनिकों के बेमिसाल बलिदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह घटना शूरवीरता की बेमिसाल गाथा है, जिसका इतिहास में कोई भी सानी नहीं है।

उन्होंने कहा कि वह इन शहीदों के महान बलिदान के आगे सजदा करते हैं, जिन्होंने दुश्मन के आगे घुटने टेकने के बजाय मरने को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि 36 सिख सैनिकों की बेमिसाल गाथा समाना रिज्ज (अब पाकिस्तान) में घटी है, जिन्होंने 12 सितंबर, 1897 को 10,000 अफगानियों के हमले के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए बलिदान दे दिया था। उन्होंने कहा कि सारागढ़ी की जंग भारतीय फौज के इतिहास में मिसाल बनी रहेगी और यह भी याद करवाती रहेगी कि जब भी पंजाबियों को पीछे धकेलने की कोशिश हुई तो उस समय पर वह अपने सामर्थ्य से अधिक ताकतवर होकर खड़े हो सकते हैं।

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जंग के दौरान दिखाए गए साहस के प्रचार की जरूरत पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि राज्य सरकार फौज के इतिहास में आखिरी सांस तक मर मिटने की महान विरासत को नौजवानों में प्रेरणा के प्रतीक के तौर पर उभारने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सारागढ़ी जंग की शौर्यगाथा सिख सैनिकों के जज्बे और दृढ़ निश्चय की मिसाल पेश करती है, जिन्होंने दुश्मन का सामना करते हुए शहादत प्राप्त की। मुल्क इन बहादुर सैनिकों के बेमिसाल बलिदान का सदा ऋणी रहेगा।

उन्होंने कहा कि वह जंग की स्मारक के काम की निजी तौर पर निगरानी करेंगे, जिससे इसको छह माह में मुकम्मल किए जाने को सुनिश्चित बनाया जा सके। इस नेक कार्य में किसी भी तरह की अनावश्यक देरी अनुचित होगी। इस स्मारक के निर्माण के अवसर पर मापदंडों का पूरा पालन किया जाएगा। निर्माण के दौरान किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया जाएगा और ऐसी हरकत की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने पंजाब के इतिहास में बेहद महत्व रखते इस स्थान को अनदेखा करने के लिए पिछली सरकारों की सख्त निंदा की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने यह स्मारक बनाने का एलान किया था और साल 2019 में एक करोड़ रुपये जारी किये थे। सीएम मान ने कहा कि यह कितने दुख की बात है कि इस स्मारक का काम कभी भी शुरू नहीं हुआ, क्योंकि इसके लिए 25 लाख रुपये की और जरूरत थी जो जारी नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि इससे शहीदों के प्रति पिछली सरकार के व्यवहार का पता लगता है।

सीएम ने फिरोजपुर जिले को राज्य में पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित करने के लिए ठोस प्रयास करने का भी एलान किया। उन्होंने कहा कि सारागढ़ी स्मारक और हुसैनीवाला, जहां शहीद भगत सिंह, शहीद सुखदेव और शहीद राजगुरू ने शहीदी प्राप्त की थी, इस जिले में आते हैं। भगवंत मान ने कहा कि हुसैनीवाला सरहद के साथ लगते ऐतिहासिक महत्ता वाले इन स्थानों को दुनिया भर के सैलानियों को दिखाया जाएगा।

पंजाब के शहीदों की गिनती नहीं की जा सकती, क्योंकि पंजाब के हर गांव की धरती का संबंध इन शूरवीरों के साथ है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र धरती पर महान गुरुओं, संतों, पीरों- पैगंबरों, कवियों और शहीदों का जन्म हुआ। पंजाबियों को अपनी सख्त मेहनत और मेहनती भावना के लिए जाना जाता है, जिसके स्वरूप उन्होंने दुनिया भर में अपनी विशेष जगह बनाई है।
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मुख्यमंत्री ने यह भी याद किया कि लोकसभा सदस्य के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान उनकी ओर से तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के समक्ष मुद्दा उठाए जाने के बाद सदन ने श्री गुरु गोबिंद सिंह के छोटे साहिबजादों के शहीदी दिवस के मौके पर उनको श्रद्धांजलि भेंट की थी।

उन्होंने कहा कि छोटे साहिबजादों के बेमिसाल और महान बलिदान मानवता को जुल्म, अत्याचार और बेइंसाफी के विरुद्ध लड़ने के लिए सदा प्रेरित करती रहेगी। छोटे साहिबजादों ने सरहिंद के मुगल सूबेदार के जुल्म और अत्याचार के विरुद्ध डटकर अथाह साहस और निडरता दिखाई। भगवंत मान ने कहा कि साहिबजादों को शूरवीरता और निस्वार्थ सेवा के गुण दसमेश पिता, जिन्होंने मानवता के कल्याण के लिए अथक लड़ाई लड़ी, से विरासत में मिले थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिखों के दसमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादे और माता गुजरी जी दिसंबर महीने में शहीद हुए थे, जिस कारण समूची कौम के लिए यह महीना शोक का महीना होता है। उन्होंने पहले ही अधिकारियों को हिदायत की हुई है कि भविष्य में इस महीने के दौरान सरकारी स्तर पर कोई भी खुशी का समागम न मनाया जाए। उन्होंने कहा कि यह प्रयास राज्य सरकार और लोगों द्वारा साहिबजादों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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