प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि योजना को शहर में लागू करने और मकान के आवंटन के लिए एक एजेंसी को हायर किया जाएगा। यह एजेंसी किराएदारों से किराया वसूल करेगी और फिर अपना खर्चा निकाल कर हाउसिंग बोर्ड को एक तय राशि अदा करेगी, जो भी एजेंसी सबसे ज्यादा राशि अदा करेगी, उसे ही प्रशासन द्वारा हायर किया जाएगा। एजेंसी पर ही मकानों की मरम्मत आदि का जिम्मा होगा।
इस स्कीम को दो हिस्सों में बांटा गया है। सबसे पहले सरकारी पैसे से बने और खाली पड़े आवासीय परिसरों को एआरएचसी में बदला जाएगा और उन्हें 25 साल के लिए सस्ते किराए पर मजदूरों और गरीबों को प्रदान किया जाएगा। योजना के दूसरे हिस्से में सरकारी और निजी कंपनियों को अपनी जमीन पर 25 साल के लिए एआरएचसी बनाने के लिए कई तरह की छूट दी जाएंगी। बता दें कि 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में इस योजना का एलान किया गया था।
कर्मचारियों, मजदूरों और छात्रों को मिलेगा योजना का लाभ
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि इस योजना का लाभ शहर के मजदूर वर्ग को होगा। कोरोना वायरस महामारी के कारण रोजगार के बेहतर मौकों के लिए गांवों और छोटे कस्बों से शहर आने वाले प्रवासी मजदूरों और शहरी गरीबों का उल्टा पलायन हुआ है। आमतौर पर किराया बचाने के लिए ये मजदूर झुग्गी-झोपड़ियों, अनाधिकृत कालोनियों और शहर के बाहरी इलाकों में रहते हैं। इसके अलावा बेहतर मौकों की तलाश में गांवों से शहर आने वाले और मैन्युफैक्चरिंग, स्वास्थ्य, निर्माण, होटलों और व्यावसायिक संगठनों में काम करने वाले कर्मचारियों, मजदूरों और छात्रों को इस योजना से काफी लाभ मिलेगा।