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Parkash Singh Badal: प्रकाश सिंह के दिल में बसता था गांव 'बादल', सबके दुख-सुख में होते थे शामिल

Thu, 27 Apr 2023 08:09 PM IST
ajay kumar जगदीश जोशी, संवाद न्यूज एजेंसी, मुक्तसर (पंजाब)

सार

पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के अंतिम संस्कार में मुख्य सलाहकार हरचरन सिंह बैंस भावुक हो उठे। पत्रकारों से बातचीत में बैंस ने कहा कि वे बादल के सलाहकार थे, मगर उन्होंने कभी ये महसूस ही नहीं होने दिया। हमेशा अपने पारिवारिक सदस्य की तरह प्यार व सम्मान देते थे।
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प्रकाश सिंह बादल की अंतिम यात्रा में पहुंचे लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के दिल में उनका अपना पैतृक गांव बादल बसता था। यही कारण था कि वे मुख्यमंत्री रहते समय भी चंडीगढ़ रहने के बजाय अपना ज्यादातर समय गांव बादल में बिताते थे। अपने हलके के लोगों के सुख-दुख में शरीक होना और समस्याएं सुनना उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा रहा।

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अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे बुजुर्ग वरियाम सिंह, उजागर सिंह, जगरूप सिंह व अन्य ने बताया कि पूर्व सीएम का अपने पैतृक गांव बादल से बेहद लगाव था। वे हर किसी के सुख-दुख में शरीक होते थे। कई बार तो वे पैदल ही गांव में टहलते-टहलते लोगों के बीच पहुंच जाया करते थे। कितनी सादगी थी, उनमें इसका पता इससे लगाया जा सकता है। उनका ज्यादातर समय अपने हलके के लोगों के बीच ही बीता है। 

आम तौर पर जितने भी मुख्यमंत्री रहे हैं, वे चंडीगढ़ निवास में ही पक्के तौर पर रहने लग जाते हैं, मगर बादल ने चंडीगढ़ के बजाय अपने गांववासियों को ज्यादा तरजीह दी है। गांव के लोग तो उनकी सादगी व विनम्रता के कायल हैं। लोगों की मुश्किलों का उनके द्वार पर हल करने के उद्देश्य से ही उन्होंने संगत दर्शन कार्यक्रम शुरू किया था, जो सिर्फ उनके कार्यकाल में ही हुआ। अन्य किसी सरकार को ऐसा कार्यक्रम करने का ख्याल तक नहीं आया। सिर्फ बादल ही थे जो संगत दर्शन के जरिये प्रदेश की संगत के बीच जाकर उनकी मुश्किलें सुनने व हल करवाने का यतन करते रहे। 

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भावुक हो गए मुख्य सलाहकार
पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के अंतिम संस्कार में मुख्य सलाहकार हरचरन सिंह बैंस भावुक हो उठे। पत्रकारों से बातचीत में बैंस ने कहा कि वे बादल के सलाहकार थे, मगर उन्होंने कभी ये महसूस ही नहीं होने दिया। हमेशा अपने पारिवारिक सदस्य की तरह प्यार व सम्मान देते थे। यहां तक कि अनेक बार तो उनके साथ ही खाना खाते थे। बादल की एक खासियत थी कि वो हर किसी के सुख-दु:ख में शरीक होते थे। 

पूरे गांव में रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
प्रकाश सिंह बादल का अंतिम संस्कार पुलिस प्रशासन के कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच हुआ। गांव बादल में प्रवेश से लेकर बादल निवास तक भारी सुरक्षा प्रबंध नजर आ रहे थे। बादल निवास से 100 मीटर पहले ही हर आने-जाने वाले व्यक्तियों की तलाशी ली जा रही थी।

वहीं बादल निवास के आगे भी डिटेक्टिव मशीन से स्कैन कर लोगों को अंदर भेजा गया। बादल निवास के अंदर भी भारी फोर्स तैनात था। वहीं अंतिम यात्रा व संस्कार के वक्त भी भीड़ पर काबू पाने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। गाड़ियों के लंबे काफिले के चलते भी लोगों की दिक्कतें बढ़ी।
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हमेशा सच की लड़ाई लड़ते थे बादल: नड्डा
पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के अंतिम संस्कार में पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि बादल हमेशा सच्चाई की लड़ाई लड़ते थे। आज वे उनके बीच नहीं है, यह बेहद दुखदाई है। उन्होंने कहा बादल की शख्सियत हर किसी को प्रभावित करती थी। बादल नेता नहीं, राजनेता थे। उन्होंने पंजाब के लोगों को खुशहाली, शांति व सामाजिक भाईचारक सांझ का संदेश देने के लिए सारी उम्र लगा दी। नड्डा ने कहा कि बादल व उनका तो निजी संबंध था। उनका जाना एक युग का अंत है।

बादल ने सारी उम्र पंजाब, देश व किसानों के हित में लगा दी: चौटाला
इनेलो अध्यक्ष अभय चौटाला ने कहा कि बादल के निधन से सिर्फ उनके परिवार को नहीं बल्कि प्रदेश के किसान परिवारों को भी क्षति पहुंची है, क्योंकि बादल ने सारी उम्र पंजाब, देश व किसानों के हितों में लगा दी। राजनीतिक तौर पर बादल ने किसानों व पंजाब को बहुत बड़ी ताकत प्रदान की। आज पूरे देश व पंजाब का किसान उनके निधन से दुखी है। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल भी उन्हीं की रवायत को आगे बढ़ाएंगे। चौटाला व बादल परिवार के सदस्य हैं। उन्हें याद है, जब बादल जेल में थे, उन दिनों उनकी बेटी की शादी थी। उस समय चौधरी देवी लाल चौटाला ने बाप की सभी रस्में निभाई थीं। अभय चौटाला ने कहा कि इसी तरह उनकी बहन की शादी थी। मगर चौटाला व चौधरी देवी लाल दोनों जेल में थे तब बादल साहब ने सभी रस्में व रिश्ते निभाए और उनकी बहन का विवाह करवाया था।
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