बरगाड़ी बेअदबी कांड से संबंधित बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड मामलों की पड़ताल कर रही एसआईटी ने कोटकपूरा घटना में हिंसक प्रदर्शन करने के आरोप में नामजद सिख प्रचारकों, जत्थेबंदियों के पदाधिकारियों और वर्करों समेत 23 लोगों को क्लीन चिट दे दी है।
इन सभी को एसआईटी ने इस केस की सही ढंग से जांच न करने, रिकार्ड में हेरफेर करने के मामले में तत्कालीन एसएचओ व डीएसपी के खिलाफ अदालत में दायर चार्जशीट में बेगुनाह करार देते हुए उन्हें खाना नंबर दो में रखा है।
जानकारी के अनुसार कोटकपूरा गोलीकांड में घटना वाले दिन 14 अक्तूबर 2015 को थाना सिटी कोटकपूरा पुलिस ने हिंसक प्रदर्शन करने के आरोप में सिख प्रचारकों भाई पंथप्रीत सिंह खालसा, भाई रणजीत सिंह ढ्ढरियां वाला, भाई हरजिंदर सिंह मांझी, भाई सतनाम सिंह चंदड़, भाई अवतार सिंह सांधावाला, सिख जत्थेबंदियों से पदाधिकारी सरबजीत सिंह घुद्दा, ज्ञानी केवल सिंह, दलेर सिंह, भाई हरजीत सिंह मानसा, सुखजीत सिंह खोसा, सुखविंदर सिंह, हरजीत सिंह ढपाली, गुरप्रीत सिंह ढ्ढरियां, गुरसेवक सिंह आदि कुल 15 नामजद व अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ इरादा ए कत्ल समेत अन्य गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
उसी दिन भाई पंथप्रीत सिंह खालसा के अलावा मंदर सिंह बरनाला, रछपाल सिंह कोठे वडिंग, बलप्रीत सिंह मोगा, बलकार सिंह बठिंडा, बग्गा सिंह मानसा, जगरूप सिंह, बेअंत सिंह कोटकपूरा व हरविंदर सिंह बरनाला को गिरफ्तार किया था। उन्हें दो दिन बाद 16 अक्तूबर को रिहा किया गया था।
अब इस केस में गोलीकांड घटनाओं की पड़ताल कर रही एसआईटी के प्रमुख सदस्य व आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह की अगुवाई में केस के शिकायतकर्ता व तत्कालीन एसएचओ गुरदीप सिंह पंधेर व तत्कालीन डीएसपी बलजीत सिंह सिद्धू को नामजद किया जा चुका है।
तीन दिन पहले अदालत में इन दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई है। एसआईटी द्वारा दायर चार्जशीट में उक्त केस में घटना वाले दिन नामजद सिख प्रचारकों, जत्थेबंदियों के पदाधिकारियों समेत गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं समेत कुल 23 लोगों को बेगुनाह करार देते हुए उन्हें चार्जशीट के खाना नंबर 2 में रखा है।
बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड की घटना के समय पुलिस ने क्रमवार थाना बाजाखाना व कोटकपूरा में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस दर्ज किए थे जिनमें से कोटकपूरा मामले में सिख प्रचारकों को नामजद किया गया था जबकि बहिबल केस अज्ञात लोगों पर दर्ज हुआ था। पुलिस द्वारा दर्ज उक्त मामलों को लेकर विवाद खड़ा होने पर उस समय राज्य सरकार ने केस रद्द करने की हिदायतें तो दी थी लेकिन उन्हें रद्द नहीं किया गया था।