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मौत के बाद धुला सेना नायक पर लगा ड्रग्स तस्करी का दाग

Fri, 14 Aug 2015 07:51 PM IST
आशीष वर्मा/अमरउजाला, चंडीगढ़
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भारतीय सेना में नायक निर्मल कुमार पर लगे ड्रग्स तस्करी के आरोप आखिरकार 19 साल बाद धुल ही गया लेकिन उनकी मौत के बाद। दरअसल ड्रग्स तस्करी के आरोप में भारतीय सेना में नायक निर्मल कुमार का पहले कोर्ट मार्शल हुआ।
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फिर दस साल की सजा और फिर नौकरी से बर्खास्तगी। अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ पहले उसने हाईकोर्ट और फिर आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) में दस्तक दी। एएफटी में सुनवाई चल ही रही थी कि निर्मल की मौत हो गई, लेकिन उसकी लड़ाई कोर्ट में जारी रही। आगे की लड़ाई उसकी पत्नी लड़ी।

करीब 19 साल की लड़ाई के बाद एएफटी ने उसे ड्रग्स तस्करी के दाग से मुक्त कर दिया। हालांकि एक अन्य आरोप में उसे दोषी माना गया और उसकी सजा कम कर दी गई। साथ ही उसकी पत्नी की पेंशन भी बहाल कर दी गई।
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नायक निर्मल कुमार 31 जनवरी 1979 में सेना में भरती हुआ था। अगस्त को 1994 को सेना की ओर से उसे बठिंडा डिपो से कुछ सामान लाने के लिए भेजा। काम पूरा होने के बाद उसे वापस राजस्थान आना था, लेकिन वह नहीं आया। उसने अपने मुख्यालय से घर जाने के लिए छुट्टी मांगी।

उसका कहना था कि उसका घर मानसा में है, जो बठिंडा से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन छुट्टी नहीं मिली। इसके बावजूद वह वापस मुख्यालय नहीं आया और न ही अपने घर पहुंचा। वह बठिंडा में ही अपने दोस्तों के घर पर रुक गया।
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हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मौत, पत्नी ने लड़ा केस

मिलेट्री पुलिस और इंटेलिजेंस ने उसके दोस्तों के घर पर छापा मारा, जहां से उन्हें एक बैग मिला। बैग से उन्हें नौ किलोग्राम नशीला पदार्थ मिला। उसे चार्जशीट किया गया। कोर्ट आफ इंक्वायरी हुई। बाद में उसका कोर्ट मार्शल कर दिया गया।

कोर्ट मार्शल में उसे नायक से सिपाही बना दिया गया। दस साल कैद और नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। सजा के खिलाफ निर्मल ने चीफ आफ आर्मी स्टाफ के उसने पटीशन डाली, जो 1996 में रद्द कर दी गई। साल 1997 में निर्मल ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दस्तक दी। दस सितंबर 1997 को उसे जमानत मिल गई। साल 2010 में उसकी याचिका एएफटी में ट्रांसफर कर दी गई।

इसी दौरान निर्मल कुमार की मौत हो गई। साल 2012 में उसकी तरफ से उसकी पत्नी और दो बच्चे वारिस बने। एएफटी ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी के खिलाफ उसके इकबालिया बयान के अलावा कोई दूसरा सुबूत नहीं है। यह बयान उसने कस्टडी के दौरान दिया है, इससे उसका आरोप साबित नहीं होता, लेकिन वह बिना परमिशन के छुट्टी पर गया था, इसमें वह दोषी पाया जाता है।

कई महीने तक वह जेल में भी रहा है। उस सजा के मद्देनजर उसकी बर्खास्तगी को रिटायरमेंट में तब्दील कर दिया गया। साथ ही बर्खास्तगी से उसकी मौत तक उसे और उसके बाद उसकी पत्नी को पेंशन देने का आदेश दिया गया है।

कैप्टन संदीप बंसल, एडवोकेट पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बताया कि इस फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी। इसके लिए एएफटी से परमिशन मांगने की कोशिश जारी है।
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