मां से भारतीय सभ्यता को गंभीरता से जानने की प्रेरणा मिली, तो पत्नी ने न केवल मेरी कला को सराहा बल्कि जीवन के हर कदम पर मेरे साथ ताल से ताल मिलाई। यह कहना है बलटाना निवासी राहुल गुप्ता का। जो ट्राइसिटी ही नहीं, बल्कि देश- विदेश में क्लासिकल डांसर के रूप में अपनी अलग ही पहचान बना चुके हैं। राहुल 15 साल से ट्राइसिटी व देश के अलग-अलग स्कूल, कॉलेजों में जाकर स्टूडेंट्स को कथक और भरतनाट्यम सीखा रहे हैं। वर्तमान में उनकी अपनी टीम है जो डांस क्लास लगाती है।
देश व भारतीय सभ्यता से प्रेम होने के कारण छोड़ा विदेश
राहुल दुबई में क्लासिकल डांस सिखाते थे, लेकिन उन्हें अपनी संस्कृति से इतना प्यार था कि वह अपने आप को रोक नहीं पाए और भारत वापस आ गए। राहुल बताते हैं कि दुबई में उन्होंने मुस्लिम और अरबी लड़कियों को नृत्य सिखाया है, जो अभी भी उन्हें दुबई में डांस क्लास लेने के लिए कहती हैं। अब वह केवल दुबई में अपनी देश का प्रतिनिधित्व करने ही जाते हैं। राहुल से प्रेरित होकर पाकिस्तानी और अरबी युवतियों ने भरतनाट्यम सीखा है।
परिवार ने हमेशा दिया सहयोग
राहुल ने बताया कि उनके पिता फ्लोरमिल में मैनेजर थे। अन्य परिजन अपने लड़कों को डांस में प्रोफेशन बनाने के लिए रोकते हैं, लेकिन उनके पिता ने हमेशा डांस का सम्मान किया। उनकी मां भी डांसर थी और उनकी पत्नी और बेटा भरत भी डांसर हैं। राहुल ने बताया कि डांस न केवल उनका शौक है, बल्कि वह उनके खून में है।