हारने के बाद कांग्रेसियों में घमासान शुरू हो गया है। पदाधिकारियों का कहना है कि जब राहुल गांधी इस्तीफा देने पर अड़े हुए हैं तो बाकी जिम्मेदारी लेने से क्यों बच रहे। चंडीगढ़ से कांग्रेस उम्मीदवार पवन कुमार बंसल हार गए। उसके बाद कांग्रेस प्रदेश कार्यसमिति में रार शुरू हो गई है।
प्रदेश कार्यसमिति के पदाधिकारी हार की समीक्षा करने के लिए बैठक बुलाने पर अड़े हैं, लेकिन पार्टी अध्यक्ष बैठक बुलाने को तैयार नहीं हो रहे। इससे खफा कांग्रेसियों ने अब कार्यक्रमों का बायकॉट शुरू कर दिया है। सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की पुण्यतिथि पर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इसमें प्रदेश कार्य समिति के सभी निर्वाचित सदस्यों को आमंत्रित किया गया था लेकिन आए सिर्फ चार। बाकी सदस्य कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। बात करने पर किसी ने बाहर जाने का बहाना बताया तो किसी ने निजी कार्यक्रम में व्यस्त होने का।
प्रदीप छाबड़ा कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य पवन शर्मा का कहना है कि जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हार की समीक्षा पर बैठक कर सकते हैं और अपना इस्तीफा दे रहे हैं तो यहां समीक्षा क्यों नहीं हो रही। प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी लगातार हार रही है। चाहे नगर निगम का चुनाव हो या लोकसभा। आप अपनी हार पर चर्चा भी नहीं कर सकते हैं। जब निर्वाचित सदस्य एक साथ कह रहे हैं कि पार्टी को बैठक बुलानी चाहिए तो इस बात पर प्रदेश अध्यक्ष पीछे क्यों हट रहे हैं।
मुझे पता है कि कहां कमियां रह गई थीं। मैं प्रदेश इलेक्शन कमेटी का सदस्य हूं, लेकिन चुनाव के दौरान मुझसे एक भी बार संपर्क नहीं किया गया। ऐसी कई सारी कमियां हैं, जिस पर चर्चा जरूरी है। कांग्रेस के एक और नेता भी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि हार की समीक्षा जरूरी है। नगर निगम में विपक्ष के नेता व पार्षद देवेंद्र सिंह बबला कहते हैं कि पूरी उम्मीद थी कि इस बार का चुनाव जीतेंगे, लेकिन चूक गए। पार्टी की रणनीति व संगठन में कहां कमियां रहीं, इस पर मंथन जरूरी है। दो साल बाद नगर निगम के चुनाव होने हैं।
पार्टी को अभी से तैयारी करने की जरूरत है। पूर्व डिप्टी मेयर व महासचिव एचएस लक्की का कहना है कि जब पार्टी के ज्यादातर सदस्य चाहते हैं कि हार की समीक्षा के लिए बैठक हो, जिम्मेदारी तय की जाए तो इसपर आपत्ति क्या है। यदि संगठन में कोई कमी है तो उसमें बदलाव किया जाना चाहिए। आखिर पार्टी कब तक हार का मुंह देखेगी।
इन्हें बुलाया गया था, लेकिन आए नहीं
सुभाष चावला, दर्शन जिंदल, पवन शर्मा, देविंदर सिंह बबला, दर्शन जिंदल, भूपिंदर सिंह, जीत सिंह, केसर सिंह, चमनलाल शर्मा, गुरबक्श रावत, कमलेश, जतिंदर भटिया, देविंदर लुबाना, शीला फूल सिंह, रामचरण गुप्ता, सुरिंदर सिंह, डा. हसन, दीपा दुबे, शशिशंकर तिवारी, भजन कौर, आनंद सिंह सहित अन्य लोग शामिल थे। कार्यक्रम में पवन बंसल, प्रदीप छाबड़ा, हरफूल कल्याण, विनोद शर्मा और अजय जोशी पहुंचे थे।
क्या कहना है प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा का
इस मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा का कहना है कि परिणाम आए सिर्फ तीन दिन हुए हैं। ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा है। मैं तय करूंगा कि बैठक कब बुलानी है। जहां तक बात जिम्मेदारी की बात है तो मुझे राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने नियुक्त किया है, जब तक वे चाहेंगे, तब मैं अपने पद पर बना रहूंगा। कार्यक्रम में जो लोग नहीं आए हैं, उनसे मेरी बात हुई है। किसी की बेटी बीमार थी तो कोई शहर से बाहर था। हमारे कई कार्यकर्ता कार्यक्रम में पहुंचे और उन्हें धन्यवाद भी दिया है। कुछ ही लोग इस तरह की बातें कर रहे हैं। सभी कांग्रेसी एकजुट हैं। भाजपा की जनविरोधी नीतियों का और तेजी से विरोध किया जाएगा।
मैं तो पौंटा साहिब गया था। यदि मैं शहर में होता तो जरूर आता। लेकिन हार की समीक्षा पर बातचीत करने के लिए बैठक जरूरी है। प्रधान की जिम्मेदारी बनती है कि वे बैठक बुलाएं और चर्चा करें।
- देवेंद्र सिंह बबला, कांग्रेसी पार्षद व विपक्ष नेता निगम
मैं यहां नहीं था। पहली बैठक तो हार की समीक्षा की होनी चाहिए थी। बैठक से ही पता चलेगा कि हमारी क्या कमियां रह गईं थीं या संगठन में कहां कमी रही। कार्यकर्ता निराश हैं। उनका उत्साह बढ़ाना जरूरी है।
- एचएस लक्की, प्रदेश महासचिव कांग्रेस
प्रदीप छाबड़ा की लीडरशिप में यह सातवां चुनाव है, जिसमें पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। मैं प्रदेश इलेक्शन कमेटी का मेंबर था, लेकिन चुनाव के बारे में एक भी बात नहीं की गई।
- पवन शर्मा, सदस्य आल इंडिया कांग्रेस कमेटी