तीर्थ पुरोहितों ने देशवासियों को भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए होने वाली परेशानी से छुटकारा दिलाने का दावा किया है, वो भी अपनी बिना आइडी प्रूफ के। ऐसे में अब तीर्थ पुरोहितों के पास बही-पोथी में दर्ज वंशावली का रिकॉर्ड बिना आइडी प्रूफ वाले व्यक्ति को अपनी पहचान व नागरिकता दिलाने में अहम साबित होगा।
नागरिकता संसोशधन कानून (सीएए) को लेकर देश में बवाल मचा हुआ है। सरकार का दावा है कि इससे किसी को भी अपनी नागरिकता साबित नहीं करनी होगी और न ही किसी को देश से बाहर निकाला जाएगा। बावजूद इसके बिल को लेकर लोगों के बीच असमंजस व भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
इस बिल से विशेषकर वह लोग काफी खौफजदा हैं जिनके पास अपनी पहचान करवाने के लिए कोई आईडी प्रूफ नहीं है। इसके लिए भी सरकार ने कुछ नियम बनाकर मुश्किल दूर करने का दावा किया है।
300-400 साल पुरानी वंशावली का रिकॉर्ड मौजूद है
उधर, तीर्थ पुरोहितों ने दावा किया है कि उनके पास नागरिकता साबित करने का अचूक बाण है। जिससे बिना आईडी प्रूफ वाले लोग अपनी पहचान ही नहीं, बल्कि अपनी पूरी वंशावली की जानकारी भी सरकार के सामने रख सकते है। पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पुरोहित परवेश कौशिक ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों की वंशावली उनके बही खातों में दर्ज है।
उनके पास करीब 300-400 साल पुरानी वंशावली का रिकॉर्ड मौजूद है। पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर तीर्थ पुरोहितों की करीब 250 दुकानें है। इन तीर्थ पुरोहितों के पास उनकी बहीं में देश के विभिन्न राज्यों के लोगों की वंशावली की जानकारी रिकॉर्ड के रुप में सुरक्षित है। यह जानकारी बाकायदा उनके दादा-परदादा के हस्ताक्षर व अंगूठे के साथ सुरक्षित है।
बही में दर्ज इस रिकॉर्ड के जरिए लोग अपनी व अपनी पूरी वंशावली की जानकारी सरकार को दे सकते है। इसके लिए लोग सोशल मीडिया का सहारा लेकर भी अपनी वंशावली का ज्ञान प्राप्त कर सकते है।
बही खातों में दर्ज सिख गुरुओं के तीर्थ पर आने का प्रमाण
तीर्थ पुरोहित विनोद पचौली ने बताया कि मानव जीवन में पुरोहितों का महत्व जन्म से मृत्यु व अंतिम संस्कार तक है। पुराणों के अनुसार देवताओं ने भी अपना कुल पुरोहित बृहस्पति को तथा दानवों ने कुल पुरोहित शुक्राचार्य को माना है। एक कुल पुरोहित है, जो कुल की सभी धार्मिक रस्में पूरी करते हैं। पिहोवा के पुरोहितों के पास कई प्राचीन अभिलेख रिकॉर्ड के रुप में सुरक्षित हैं।
यह रिकॉर्ड बही या पोथी में सुरक्षित हैं। यहां के पुरोहितों के पास 300 से 400 वर्ष पुराने रिकॉर्ड देखे जा सकते हैं। सिखों में दशम गुरु गोबिंद सिंह का रिकार्ड भी बही खातों में मौजूद है। इससे पहले के रिकॉर्ड को मुगल बादशाह औरंगजेब ने नष्ट करवा दिया था। उनकी बही में करीब पिछले 400 साल का रिकॉर्ड दर्ज है।
सिखों के दशम गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार को पूरा ब्यौरा उनकी बही में मौजूद है। इसके अलावा कई प्रसिद्ध हस्तियों की पारिवारिक वंशावली यहां के पुरोहितों की बही में मौजूद है। पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह की वंशावली का रिकॉर्ड भी बही में मौजूद है।