यूएस एंबेसी के डिप्टी चीफ माइकल पैलेटियर ने कहा कि अमेरिकी सरकार भारतीयों के लिए जल्द वीजा देने के लिए सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। अमेरिकी सरकार ने 69 फीसदी एच1बी वीजा और 29 फीसदी एच1एन1 वीजा भारतीयों को दिए हैं। उनका कहना है कि पिछले साल भारतीयों के दस लाख वीजा आवेदन प्रोसेस हुए। भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार को 104 अरब डॉलर से बढ़ाकर पांच सौ अरब डालर तक पहुंचाने के लिए दोनों देशों को ओवर टाइम करना चाहिए। दोनों देशों के बीच पांच सौ अरब डॉलर का व्यापारिक लक्ष्य अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तय किया है।
माइकल पैलेटियर सोमवार को वह सेक्टर-31 स्थित सीआईआई में आयोजित इनवेस्टिंग, ट्रेडिंग एंड ट्रेवलिंग टू यूनाइटेड स्टेट्स पर आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। पैलेटियर ने कहा कि दोनों देशों द्वारा पूर्णकालिक विकास के लिए निवेश सबसे ज्यादा आवश्यक है। अमेरिका में भारतीय स्वामित्व वाली कंपनियों ने 44,000 लोगों को रोजगार दिया है और यह अमेरिका के निर्यात में 2 अरब डॉलर का योगदान देती हैं।
उन्होंने कहा कि सेलेक्ट यूएस शिखर सम्मेलन में दूसरा सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल भारत से था। यही शिखर सम्मेलन इस साल जून में आयोजित किया जाएगा। सीआईआई चंडीगढ़ काउंसिल के चेयरमैन दिनेश दुआ ने कहा कि रिपोर्ट से पता चला है कि सौ भारतीय कंपनियों ने 433 करोड़ डालर प्रति राज्य के एक औसत के साथ अमेरिका में 15.3 अरब डालर का संचयी मूर्त निवेश किया है। 20 अमेरिकी राज्यों टेक्सास, पेंसिल्वेनिया, मिनेसोटा, न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी में 100 मिलियन डालर से अधिक भारतीय कंपनियों ने निवेश किया है। हालांकि, यहां कई ऐसे क्षेत्रों भी हैं जहां अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश कर सकती हैं।
वहीं अमेरिकी दूतावास के वाणिज्य अधिकारी पॉल फ्रास्ट ने भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने पर आधारित एक ब्रेकआउट सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका और भारतीय व्यापारियों के बीच मैच मेकिंग सेवाएं शुरू की गई हैं। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा। वहीं पर्यटन और शिक्षा पर आधारित एक सत्र में अमेरिकी दूतावास से आए प्रतिनिधियों ने शैक्षिक प्रतिष्ठानों और टूरिज्म के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से बाधारहित पर्यटन और एजूकेशन हासिल की जा सकती है।