केंद्र सरकार द्वारा हिंदी भाषा को राष्ट्र स्तर पर पहचान दिलाने के लिए अधिक बल दिया जा रहा है। शिक्षाविदों ने भी सरकार के इस कदम को सराहनीय बताया है। कुछ शिक्षकों का यह भी कहना है कि हिंदी भाषा के बिना हमारे देश की पहचान आशंका में है। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे अंग्रेजी भाषा के डर से विज्ञान या अन्य तकनीकी विषय पढ़ने से किनारा करते थे। लेकिन सरकार के इस फैसले के बाद ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा।
प्रो. अंकित गर्ग का कहना है कि हिंदी भाषा से अधिकांश विद्यार्थियों को लाभ होगा। जो बच्चे अंग्रेजी भाषा के डर के मारे नॉन मेडिकल या अन्य अंग्रेजी के विषय लेने से डरते थे। अब उनको लिए यह आसान हो गया है। इस शिक्षा प्रणाली में बच्चे पांचवी कक्षा तक हिंदी में पढ़ेंगें तो उनको हिंदी के हर शब्द के बारे में पूरी जानकारी होगी। छठी कक्षा से ही बच्चे कंपयूटर व वोकेशनल प्रोग्र्रामिंग भाषाएं सीख पाएगें।
प्रो. रेनू कंसल का कहना है कि हिंदी का अधिक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों की 70 प्रतिशत आबादी को लाभ होगा। जो विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं, उनके मन में कहीं न कहीं अंग्रेजी भाषा को लेकर भय बना रहता था, जिसके कारण गांव के विद्यार्थी तकनीकी विषय या नॉन मेडिकल जैसे विषयों में बहुत कम रूचि दिखाते थे। उनको बच्चों को अब हिंदी भाषा लागू होने पर फायदा जरूर होगा।
अजय शर्मा का कहना है कि केंद्र सरकार का फैसला सराहनीय है। हिंदी हमारी राजभाषा है। इस पर बल देकर अच्छा कदम उठाया है। इससे बच्चों को अन्य विषय लेने में काफी लाभ होगा। जो बच्चे विज्ञान या टेक्निकल विषय लेने से किनारा करते थे। उनके लिए आसान काम हो गया है। उन बच्चों का भी हौसला बढ़ेगा और हिंदी मातृ भाषा में ही वह विज्ञान जैसे विषयों को पढ़ पाएगें।
प्रो. कविता का कहना है कि शिक्षा नीति में कई साल बदलाव हुए है। यह समय की मांग भी थी कि शिक्षा नीति में बदलाव हो। इसमें हिंदी मातृ भाषा पर अधिक फोकस किया गया है। प्राइमरी शिक्षा तक हर बच्चे को हिंदी के हर अक्षर का ज्ञान होगा। इससे आने वाले भविष्य में भी हिंदी भाषा राष्ट्र स्तर पर अपना विस्तार करेगी।