आर्थिक रूप से संपन्न हरियाणा, पंजाब जैसे प्रांतों में बच्चों का कुपोषण से ग्रस्त होना वास्तव में चिंता का विषय है। इस तरह की स्कीमों का क्रियान्वयन और अधिक रूचिकर बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए, ताकि स्कूलों में बच्चों की संख्या बढे़ और ड्राप आउट कम हो। डॉ. महाबीर ने कहा कि यह योजना 371 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित की जा रही है, जो सबसे बड़ी स्कीम है।
इस स्कीम में प्रदेश के साढे़ 14 लाख बच्चों को कवर किया जा रहा है। प्रदेश के स्कूलों में लागू इस योजना के तहत सभी बच्चों को प्रोटीन, कैल्शियम, कैलोरी, मिनरल्स, विटामिन से भरपूर स्वादिष्ट भोजन मिले इसके लिए सभी जिला स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों को समय-समय पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए, ताकि इसकी गुणवत्ता में ओर ज्यादा सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि खाने में फोर्टिफिकेशन बढ़ाने के साथ पेट के कीड़े मारने की एलबेंडाजोल टेबलेट दी जा रही है। इसके अलावा आयरन की कमी दूर करने के लिए बच्चों को फोलिक एसिड टेबलेट दी जा रही है ताकि बच्चों में कुपोषण में कमी लाई जा सके।
प्रदेश के 2381 स्कूलों में किचन गार्डन स्थापित
अतिरिक्त निदेशक डॉ. वंदना दिसोदिया ने कहा कि प्रदेश के 2381 स्कूलों में किचन गार्डन स्थापित किए गए है और शीघ्र ही सभी स्कूलों में स्थापित किए जाएंगे। मिड डे मील को शिखर तक ले जाने के लिए विभाग प्रयास कर रहा है। कार्यशाला में फोर्टिफाईट खाद्य सामग्री के प्रयेाग पर पूरा बल दिया गया।
वहीं, निदेशक माध्यमिक स्कूल शिक्षा ने कहा कि मिड डे मील योजना के तहत छह जिलों में फोर्टिफिकेशन युक्त आटा मुहैया करवाया जा रहा है। इसके अलावा डबल टोंड युक्त नमक एवं दूध भी दिया जा रहा है ताकि बच्चों को थायराइड जैसी बीमारियों से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 14400 स्कूलों में 11000 से अधिक माध्यमिक स्कूल है। इन स्कूलों में खाने की कमी को दूर करने का प्रयास करेंगे, तो शिक्षा के क्षेत्र में सुधार होगा। अंत में प्रधान सचिव ने मिडडे मील योजना में सराहनीय कार्य करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को सम्मानित किया।