चंडीगढ़। कोरोना वायरस वयस्कों के दिल से दिमाग को तो प्रभावित कर ही रहा है, अब बच्चों में भी इसके अलग अलग दुष्प्रभाव सामने आने लगे हैं। विदेशों में पहली लहर से ही सामने आने वाले कोविड टो की समस्या मौजूदा समय में ट्राइसिटी के बच्चों में भी दिख रही है। चिंता की बात यह है कि ट्राइसिटी से ऐसे केस अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मोटॉलजी एसोसिएशन में रिपोर्ट हुए हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना टीका लगवाने वालों पर इसका दुष्प्रभाव कम देखने को मिल रहा है। इसलिए विशेषज्ञ अभिभावकों को बच्चों को जल्द से जल्द टीका लगवाने की सलाह दे रहे हैं।
त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मोटॉलजी एसोसिएशन के फेलो डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि टीके का परिणाम त्वचा संबंधी समस्याओं में भी कारगर साबित हो रहा है। खासतौर पर जिन लोगों ने टीके की दोनों खुराक लगवाई है, उनमें ऐसी समस्या होने पर उसमें तेजी से रिकवरी देखी जा रही है जबकि जिन्होंने टीका नहीं लगवाया, उनमें दवाओं का असर कम और संक्रमण का स्तर व्यापक पाया जा रहा है। यही स्थिति बच्चों में भी है। 15 से 18 वर्ष के जिन बच्चों ने टीका लगवा लिया है, उनमें ऐसी समस्या न के बराबर है जबकि न लगवाने वाले बच्चों में स्थिति गंभीर है।
टीकाकरण की अहम भूमिका
डॉ. विकास ने बताया कि कोरोना की पहली लहर के दौरान विश्व के अलग-अलग देशों में बड़ों और बच्चों में कोविड टो के मामले सामने आ चुके हैं। कोरोना की पहली लहर सर्दियों में आई थी। उस दौरान चिलब्लैन के केस भी आते हैं। इसलिए उस दौरान इसे समझने में भ्रम हुआ। उस पर दवाओं का असर नहीं होने पर उन मरीजों की कोरोना जांच कराई गई, जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई। उसे सूडो चिलब्लैन टो नाम दिया गया। धीरे धीरे इसके मामले देश के अलग-अलग शहरों में सामने आ रहे हैं। शोध से यह साबित हुआ है कि टीकाकरण के बाद ऐसे लक्षण आने पर भी स्थिति गंभीर नहीं होती।
कोविड टो के लक्षण
अंगुलियों में सूजन, त्वचा में लाल और नीलापन, खुजली, पानी वाले छाले, दर्द और स्थिति गंभीर होने पर मवाद भी बन सकता है।
क्या होता है कोविड टो
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी एसोसिएशन (एएडी) के अनुसार पैर की अंगुलियों पर दिखाई देने वाले असामान्य तरीके के घाव के आधार पर इसे कोविड टो नाम दिया गया है। शोध के अनुसार यह समस्या हाथों और पैर की किसी भी उंगली में हो सकता है। घाव के अलावा हाथ या पैर की उंगलियों में लालिमा की भी समस्या हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि वैसे तो कोविड-टो, ज्यादा चिंताकारक समस्या नहीं है, हालांकि जब घाव या लालिमा एक उंगली से होकर दूसरी में बढ़ने लगे तो इसके चलते लोगों को कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। कोविड-टो का समय पर इलाज न होने पर त्वचा के नीचे मवाद इकट्ठा हो सकती है।