बाल कल्याण समिति और हरियाणा बाल संरक्षण आयोग के पदाधिकारियों के अनुसार, पिछले दो साल में रोहतक के अलावा अन्य जिलों से दो साल के अंदर 50 से अधिक झारखंड के मासूमों को इस दलदल से निकाल चुका है। इनमें से करीब साठ प्रतिशत को पढ़ाई का झांसा देकर लाया गया था। इस संबंध में पुलिस को भी रिपोर्ट सौंपने की बात कही गई है।
खाना कर दिया जाता है बंद
खरीदकर लाए जाने वाले मासूम यदि किसी भी तरह का कार्य करने से मना करते हैं तो उनकी पिटाई कर दी जाती है। दो-दो दिन तक खाना नहीं दिया जाता है। सेक्टर दो में पकड़े गए मासूम ने भी खाना नहीं देने की शिकायत की थी।
बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह पर शिकंजा कसा जाएगा। इसके लिए समिति के पदाधिकारी भी जुट गए हैं। पुलिस का पूरा सहयोग किया जाएगा। दिल्ली का गिरोह ही पढ़ाई का झांसा देकर झारखंड से बच्चों को लाता है।
- डॉ. राज सिंह सांगवान, चेयरमैन, सीडब्ल्यूसी