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लापरवाही की हद: ऑपरेशन के लिए तारीख पर तारीख, बच्चे ने PGI में तोड़ा दम

Mon, 24 Apr 2017 09:43 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बच्चे ने PGI में तोड़ा दम
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मानसा का आठ वर्षीय अनमोल प्रीत सिंह पीजीआई की लेटलतीफी का शिकार हो गया है। आठ मार्च को ब्रेन ट्यूमर की शिकायत पर उसे पीजीआई की इमरजेंसी में दाखिल कराया था। डाक्टरों ने कहा कि आपरेशन होना है। एक आपरेशन तत्काल कर दिया गया, जबकि दूसरे के लिए उसे तारीख पर तारीख मिलती रही। करीब एक महीने तक डाक्टर उसे आश्वासन देते रहे। आपरेशन नहीं होने पर 16 अप्रैल को उसने दम तोड़ दिया। अनमोल के चाचा गुरजंट ने बताया कि उसकी हालत लगातार खराब हो रही थी। डाक्टरों को बताते थे, लेकिन वे गंभीर नहीं थे।
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13 मार्च को मंगवाया सामान, फिर वापस कराया
गुरजंट सिंह ने बताया कि 9 मार्च के बाद 13 मार्च को दूसरे आपरेशन की तारीख दी गई। डाक्टरों ने गुरजंट से सामान भी मंगवा लिया। बाद में डाक्टरों ने कहा कि आज आपरेशन नहीं हो सकता। सामान वापस कर दो। दोबारा से तारीख दी जाएगी। उसके बाद रोजाना डाक्टर जांच के लिए पहुंचते, लेकिन आपरेशन की तारीख नहीं मिली। 14 अप्रैल को उसकी तबियत काफी खराब हो गई। सांस टूटने लगी। आवाज आना तक बंद हो गई, लेकिन डाक्टरों ने ध्यान नहीं दिया।

डेढ़ महीने रहा दाखिल, फिर भी नहीं दी तारीख
अनमोल पिछले डेढ़ महीने से पीजीआई के डिजास्टर वार्ड में एडमिट था। उसके परिजन मजदूरी करते है। गुरजंट ने बताया कि तारीख नहीं मिलने की स्थिति पर पीजीआई में कुछ लोगों ने कहा कि प्राइवेट हास्पिटल चले जाओ। लेकिन इलाज काफी महंगा होने के कारण बात नहीं बन सकी। गुरजंट ने बताया कि उनका भतीजा बहुत ही होशियार था। चौथी क्लास में पढ़ता था।
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इसलिए आपरेशन की तारीख में देरी

पीजीआई में सुविधा
डिजास्टर वार्ड में इलाज के इंतजार में कई मरीज
ट्रामा सेंटर के नीचे पीजीआई का डिजास्टर वार्ड है। इसमें कई मरीज ऐसे हैं, जो पिछले कई दिनों से आपरेशन का इंतजार कर रहे हैं। कोई डेढ़ महीने से इंतजार कर रहा है तो कोई 20 दिनों से। इस बारे में अमर उजाला ने 15 अप्रैल के अंक पर एक खबर भी प्रकाशित की गई थी। इसमें बताया गया था कि कई मरीज आपरेशन के इंतजार में हैं। उन्हें आपरेशन की तारीख नहीं मिल रही।

इसलिए आपरेशन की तारीख में देरी
1. नौ से ज्यादा आपरेशन थिएटर का बंद होना।
2. जूनियर डाक्टरों को ओटी न देना।
3. मनमर्जी से आपरेशन की लिस्ट तैयार करना।
4. मरीजों का बोझ बढ़ना

यदि समय पर अनमोल प्रीत सिंह का आपरेशन हो जाता तो शायद वह जिंदा होता। मौत से ठीक एक हफ्ते पहले भी आपरेशन की तारीख देने की बात कही थी, लेकिन आपरेशन नहीं किया।
- गुरजंट सिंह, अनमोल के चाचा मानसा

इस केस में क्यों देरी हुई, इसका पता करना होगा। आम तौर पर गंभीर मरीजों को इतना इंतजार नहीं करना पड़ता है। जो मरीज गंभीर होता है उसे इलाज में प्राथमिकता दी जाती है।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई
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