सड़क किनारे भुट्टे बेचता बच्चा
- फोटो : अमर उजाला
सिटी ब्यूटीफुल में आज भी बच्चों से बाल श्रम कराए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। चार साल में बाल श्रम के 115 मामले आ चुके हैं। श्रम विभाग के अभियान के दौरान पकड़े गए ऐसे बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी के सुपुर्द किया जा चुका है। यहां लगभग 70 बाल मजदूरों की देखरेख की जा रही है। बता दें कि बाल श्रम कराना गैर-कानूनी हो चुका है। देश में इसे लेकर कई सख्त कानून बनाए जा चुके हैं।
इसके बाद भी चंडीगढ़ में लगातार बाल श्रम कराया जा रहा है। यदि हम चार साल की बात करें तो यहां पर अभी तक 115 बाल श्रम के मामले आए हैं। श्रम विभाग के हर सप्ताह चलाए जाने वाले अभियान में यह सच उजागर हुआ है। इस साल मई 2020 तक शहर में बाल श्रम के 8 मामले सामने आए हैं। श्रम विभाग के अधिकारियों की मानें तो समय-समय पर लोगों को बाल श्रम को लेकर जागरूक भी किया जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी हालात नहीं सुधर रहे हैं।
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2019 में आए सबसे ज्यादा मामले
चार साल में बाल श्रम कराए जाने के साल 2019 में सबसे ज्यादा 59 मामले सामने आए। 2017 में 27, 2018 में 21 और मई 2020 तक आठ मामले चंडीगढ़ में आ चुके हैं।
अभियान: बाल श्रम के कठोर नियमों को बताया
श्रम विभाग, जिला बाल संरक्षण और समाज कल्याण विभाग ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर संयुक्त जागरूकता अभियान चलाया। अभियान के दौरान अधिकारियों ने लोगों को बाल श्रम के कठोर नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यापारी बच्चों से काम करवाते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ पांच साल तक जेल की सजा का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी है। अभियान के दौरान जिला बाल संरक्षण अधिकारी तवस्सुम खान, लेबर इंस्पेक्टर रामपाल कटारिया आदि उपस्थित थे।