बच्चों में हार्ट डिसीज के लिए जिम्मेदार जीन का पता चला है। पीजीआई सहित छह संस्थान की रिसर्च में सामने आया है कि दुर्लभ जीन आरएएफ-1 म्यूटेशन की वजह से बच्चे डाइलेटड कार्डियोमायोपैथी (डीसीएम) से पीड़ित हो रहे थे। डीसीएम से पीड़ित नौ प्रतिशत मरीजों का हृदय आरएएफ-1 जीन की वजह से खराब हुआ था।
साल 2005 से सेंटर फार सेल्युलर एंड मालीक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के वैज्ञानिकों ने जीन पर काम करना शुरू कर दिया था।
इस महाखोज अभियान में पीजीआई के कार्डियोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अजय बहल व एक्सपेरिमेंटल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी के प्रोफेसर मधु खुल्लर का काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे भी इस प्रोजेक्ट पर नार्थ इंडिया में आने वाले केसों पर काफी दिन से काम कर रहे थे।
इस खोज को हाल ही में अंतरराष्ट्रीय जरनल नेचर जेनेटिक्स ने प्रकाशित किया है। विशेषज्ञों ने बताया कि डीसीएम जब एक्टिव होता है तो उसका एक मात्र इलाज हार्ट ट्रांसप्लांट होता है।
स्टेम सेल थैरेपी दूसरा आप्शन है, लेकिन नए जीन के पता चलने से अब इसका इलाज दवाओं से भी संभव हो सकेगा। इसके लिए ट्रायल शुरू हो गया है। जेब्राफिश पर किए गए ट्रायल में पाजिटिव परिणाम आए हैं।
क्या होता है डीसीएम
डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी (हृदय, मायो-मांसपेशी, पैथी-समस्या) हृदय की मांसपेशियों का एक प्रकार का रोग है, जिसमें हृदय के आकार में असामान्य वृद्धि, मांसपेशियों की दीवारों में मोटाई या बड़े पैमाने पर बढ़ना, मोटी या कठिन और आकार में सिकुड़ने के साथ होता है।
इससे हृदय की सिकुड़ने और पंप करने या रक्त को प्राप्त करने के लिये विस्फारण क्षमता समाप्त हो जाती है। बताया गया है कि 30 लाख हर साल हार्ट डिसीज से पीड़ित होते हैं। डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी खास तौर पर 5-15 साल के उम्र के बच्चों व किशोर में होता है। जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती है और वे मौत के करीब पहुंच जाते हैं।
ये संस्थान कर रहे थे काम
इस कामयाबी में सेंटर फार सेल्युलर एंड मालीक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के वैज्ञानिकों के अलावा कई और संस्थान भी काम कर रहे थे। इसमें डिपार्टमेंट आफ जेनेटिक्स एंड जीनोमिक साइंस, न्यूयार्क, पीजीआई चंडीगढ़, चेन्नई के लोएला कालेज का डिपार्टमेंट आफ एडवांस जूलॉजी एंड बायोटेक्नोलॉजी और टोक्यो स्थित टोक्यो वूमेन्स मेडिकल यूनिवर्सिटी का डिपार्टमेंट आफ पीडियाट्रिक सर्जरी के रिसर्चर व डाक्टर शामिल थे। इसमें नार्थ व साउथ इंडिया, जापान और इटली के पीड़ितों को शामिल किया गया था।