हरियाणा में रियल एस्टेट कारोबार में आए उछाल के बीच भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने कॉलोनियों को लाइसेंस देने के मुख्यमंत्री के अधिकार को समाप्त कर दिया है। ढाई दशक पुरानी इस नीति के तहत राज्य के मुख्यमंत्री को कॉलोनियों के लाइसेंस देने का पूर्ण अधिकार दिया गया था।
सरकार का मानना है कि इससे लाइसेंस प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। साथ ही भ्रष्टाचार पर भी शिकंजा कसेगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल के 25 साल पुराने इस फैसले को पलटते हुए कहा कि यह कानून के विरुद्ध था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा डेवलेपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरिया एक्ट के तहत डायरेक्टर के पास अधिकार होने के बावजूद इसकी अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रावधानों को ताक पर रखकर लाइसेंसिंग का अधिकार वर्ष 1991 से सीएम के पास दे दिया गया था।
ढींगरा कमेटी ने अधिकार पर उंगली उठाई थी
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बात का खुलासा उस वक्त हुआ, जब उनके पास इस संबंध में फाइलें भेजी गईं। उसके बाद के सभी मुख्यमंत्रियों ने इस नीति को जारी रखा। चूंकि यह परंपरा कानून के खिलाफ थी, इसलिए मैंने तत्काल प्रभाव से इसे समाप्त करने का फैसला लिया।
उन्होंने कहा कि बिल्डरों को कॉलोनी का लाइसेंस देने का व्यापक असर होता था। हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अरबन एरिया एक्ट के तहत टाउन एंड कंट्री प्लानिंग निदेशक को लाइसेंस देने के अधिकार होने के बावजूद ऐसी फाइलें सहमति के लिए मेरे पास आती थीं।
मुख्यमंत्री ने अपने हस्ताक्षर से वीरवार को इस आदेश को पास कर दिया। माना जा रहा है कि यह कदम इसलिए भी उठाया गया है कि राज्य में बिल्डरों को दिए गए कई लाइसेंस सवालों के घेरे में हैं, जिनमें गुड़गांव की एक कंपनी सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की भी है।
गौरतलब है कि वाड्रा सहित अन्य बिल्डरों को कामर्शियल लाइसेंस देने की जांच के लिए गठित ढींगरा कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में मुख्यमंत्री द्वारा लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था पर उंगली उठाई थी।