डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर किशन लाल, निर्मल और कुलदीप के साथ मिलकर साजिश रचकर सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या कराने का आरोप है। आरोप है कि बाइक पर आए कुलदीप ने गोली मारकर रामचंद्र छत्रपति की हत्या कर दी थी, उसके साथ निर्मल भी था। छत्रपति ने अपने सांध्य कालीन समाचार पत्र ‘पूरा सच’ में इस संबंध में अनाम साध्वी का पत्र प्रकाशित किया था। छत्रपति हत्याकांड केस की 2003 में एफआईआर दर्ज हुई थी और 2006 में जांच के लिए यह केस सीबीआई को सौंपा गया था।
यह था मामला
गौरतलब है कि 24 अक्टूबर 2002 को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर हमला कर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था। 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में रामचंद्र छत्रपति जिंदगी की लड़ाई हार गए थे, लेकिन उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने हार नहीं मानी और सीबीआई जांच की मांग के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
नवंबर 2003 में हाईकोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज की और दिसंबर में इस केस की जांच शुरू हो गई थी। हालांकि 2004 में डेरा सच्चा सौदा ने यह जांच रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के राम रहीम की याचिका को खारिज कर दिया था। करीब 16 साल इस केस की सुनवाई पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चली।
अब दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट 11 जनवरी को अपना फैसला सुनाएगी। यह वही अदालत है जिसने गुरमीत राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। ऐसे में यदि 11 जनवरी को कोई फैसला आता है तो सलाखों के पीछे बंद गुरमीत राम रहीम की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।