चंडीगढ़। डीसी के रीडर का नाम का इस्तेमाल कर बूथ को अलॉटमेंट का झांसा देने के आरोप में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि वरिदर कुमार (70) के पास डीसी के रीडर विनोद कुमार के आईकार्ड थे। इस साजिश में मनदीप नामक व्यक्ति उसकी मदद कर रहा था।
दोनों के खिलाफ साजिश और धोखाधड़ी के तहत सेक्टर- 17 थाने में मामला दर्ज किया गया है। वहीं, अब इस केस की जांच सेंट्रल एसडीएम हरजीत सिंह संधू को सौंप दी गई है।
पुलिस को दी शिकायत में खरड़ के सनी एनक्लेव निवासी सुभाष गोयल ने बताया कि उनके बेटे सुशांत गोयल की सेक्टर 41/डी बूथ नंबर 134/135 में एसजीएस के नाम से मोबाइल की दुकान चलाता है। बेटे के मोबाइल पर विनोद नामक शख्स का फोन आया कि वह चंडीगढ़ इस्टेट ऑफिस से बोल रहा है। वह उनका सेक्टर 41/डी के बूथ नंबर- 133 का 52 लाख में अलॉटमेंट करवा देंगे। इसके बाद 16 जून को दुकान पर आकर वरिंदर ने कहा कि 24 जून तक आवंटन प्रक्रिया शुरू की गई है। आवेदक को आवंटन राशि का 10 फीसदी और साथ ही आवेदन के प्रोसेसिंग शुल्क के लिए 2500 रुपये की व्यवस्था करनी होगी। इसके बाद सुशांत गोयल की तरफ से उक्त राशि की व्यवस्था की गई, लेकिन मामला संदिग्ध लगा तो उन्होंने जांच में पाया कि अलॉटमेंट कराने की बात कहने वाला कोई और अन्य व्यक्ति है। जबकि विनोद कुमार डीसी का रीडर है। इसके बाद इसकी शिकायत पुलिस को दी गई। शुक्रवार को आरोपी ने शिकायतकर्ता को 11.82 लाख रुपये लेकर इस्टेट ऑफिस के पास बुलाया था। इसके बाद सेक्टर- 17 थाना पुलिस ने जाल बिछाया और शिकायतकर्ता को पैसा लेने भेजा, जहां पहले से जाल बिछाकर बैठी पुलिस ने दो आरोपी वरिंदर कुमार और मंदीप को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब इस्टेट ऑफिस के अन्य कर्मचारियों की जांच कर रही है।