ऑनलाइन से बुक होने वाली टैक्सियों पर नगर निगम टैक्स लगा सकता है। इस समय शहर में ओला, उबेर और टैक्सी फार श्योर कंपनी से जुड़ी सैकड़ों टैक्सियां सड़कों पर चल रहीं हैं। इस समय नगर निगम निजी टैक्सी स्टैंड वालों से जरूर हर माह शुल्क चार्ज करता हैं।
नगर निगम में आनलाइन टैक्सी वालों पर चार्ज के अलावा यह भी मामला सामने आया है कि इनके लिए हर सेक्टर में एक से दो जगह पार्किंग के लिए तय की जानी चाहिए। सोमवार को नगर निगम की सदन की बैठक में भाजपा पार्षद सौरभ जोशी ने इन टैक्सियों पर पार्किंग टैक्स लगाने की बात रखी थी जिस पर मेयर ने विचार करने का आश्वासन दिया है।
जोशी का कहना है कि इनके लिए नगर निगम को पॉलिसी भी बनानी चाहिए जिसके तहत हर सेक्टर में उनकी पार्किंग की जगह तय होे। भाजपा पार्षद का कहना है कि टैक्सियों पर टैक्स लगाने और पॉलिसी बनाने के लिए वह जल्द ही लिखित प्रस्ताव भी नगर निगम को देंगे ताकि अगले माह होने वाली बैठक में इस पर चर्चा की जा सके।
जोशी का कहना है कि इस समय आनलाइन पर बुक होने वाली टैक्सियों के लिए कोई जगह तय नहीं है वह इधर उधर बाजारों की पार्किंग में पार्क हो रही हैं।
उनका कहना है कि उनके वार्ड के सेक्टर-15 में ही दर्जनों टैक्सियां पार्क रहती हैं जिस कारण अन्य लोगों को पार्किंग की जगह नहीं मिलती है। हर सेक्टर में एक से दो जगह पार्किंग तय होनी चाहिए। ये टैक्सियां शहर की पार्किंग और सड़कों का प्रयोग कर रही हैं, ऐसे में इन पर टैक्स लगना चाहिए।
साढ़े छह से 10 हजार का किराया
इस समय शहर में 100 से ज्यादा टैक्सी स्टैंड है जिनसे नगर निगम हर माह 6500 से दस हजार रुपये प्रति माह चार्ज किया जाता है।
निगम को भी चाहिए आय का साधन
चर्चा के बाद नगर निगम भी इस नए टैक्स को लगाने के लिए इसलिए विचार कर रहा है, क्योंकि नगर निगम को प्लान बजट में ही 85 करोड़ की राशि मिली है ऐसे में नगर निगम को आय के साधन बढ़ाने हैं। शहर के विकास कार्याें को वह इस बजट से पूरा नहीं कर सकता है।
मालूम हो कि मेयर अरुण सूद ने अधिकारियों को दूसरे राज्यों से आने वाले कामर्शियल वाहनों पर भी एंट्री टैक्स लगाने के लिए कहा है जिस पर अधिकारी प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। अधिकारी दिल्ली की तर्ज पर कामर्शियल वाहनों पर एंट्री टैक्स लगाने पर विचार कर रहे हैं।