पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बब्बर खालसा के आतंकी जगतार सिंह हवारा के खिलाफ 18 साल पुराने दो आपराधिक मामलों में अब मुकदमा शुरु होगा। शुक्रवार को जिला अदालत में अतिरिक्त सत्र न्यायलय ने हवारा के खिलाफ वर्ष 2005 में सेक्टर-17 और सेक्टर-36 थाने में संगीन धाराओं में दर्ज मामलों में आरोप तय किए हैं।
लंबे समय से आरोप तय करने की कार्रवाई रुकी हुई थी क्योंकि बचाव पक्ष के वकील अमर सिंह चहल द्वारा हवारा को पेश करने की मांग की जा रही थी। उनका कहना था कि आरोपी की मौजूदगी में ही आरोप तय होना चाहिए। हालांकि अभियोजन पक्ष पंजाब के मौजूदा हालातों और हवारा के आपराधिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही आरोप तय और मुकदमा चलाने की मांग कर रहा था।
चंडीगढ़ प्रशासन ने भी अदालत में एक अर्जी दायर की थी, जिसे अदालत ने हाल ही में मंजूर करते हुए हवारा के मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराने का आदेश दिया था। अब आरोप तय होने के बाद चार और पांच सितंबर की तारीख मुकदमा चलाने के लिए तय की गई है। हवारा के खिलाफ वर्ष 2005 में दर्ज दो आपराधिक मामलों में देश के खिलाफ जंग छेड़ने, हथियार जुटाने, दंगा भड़काने के लिए उकसाने वाला कृत्य करने और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं समेत आर्म्स एक्ट और विस्फोटक अधिनियम की धाराएं लगाई गईं थीं।
इससे पहले सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दिल्ली तिहाड़ जेल प्रशासन ने भी हवारा को चंडीगढ़ में पेश करने पर असमर्थता जाहिर की थी। पिछले वर्ष जिला अदालत ने आदेश मे कहा था कि अगर दिल्ली में हवारा के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है तो उसे बुड़ैल जेल शिफ्ट किया जा सकता है। उसके खिलाफ प्रोडक्शन वारंट भी जारी किया गया था।
तिहाड़ में काट रहा उम्रकैद की सजा
दिल्ली जेल प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया और उसे पेश नहीं किया था। बब्बर खालसा इंटरनेशनल के आतंकी हवारा को पूर्व सीएम बेअंत सिंह हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। बाद में इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया था। बता दें कि हवारा समेत अन्य आतंकियों ने 31 अगस्त 1995 को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को पंजाब सिविल सचिवालय परिसर में बम धमाके में मारा था। बाद में आतंकी हवारा अपने दो साथियों समेत बुड़ैल जेल से जनवरी 2004 में 94 फीट लंबी सुरंग खोद फरार हो गया था लेकिन बाद में सभी पकड़े गए थे।