चंडीगढ़ के सेक्टर-37 में करोड़ों की कोठी पर कब्जे और उसके मालिक को प्रताड़ित करने के मामले में एसआईटी ने शुक्रवार को करीब 18 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। पुलिस ने इस मामले में 78 लोगों को गवाह बनाया है। ये वे लोग हैं, जो आरोपियों के साथ उठते-बैठते थे। इसके साथ ही पुलिस ने आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ 2 और धाराएं लगाई हैं।
पुलिस ने जिन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है, उनमें पत्रकार संजीव महाजन, डीएसपी रामगोपाल के भाई सतीश डागर, पूर्व एसएचओ राजदीप सिंह व मनीष गुप्ता शामिल हैं। ये सभी जेल में बंद हैं। जो आरोपी फरार चल रहे हैं, उनके खिलाफ बाद में चार्जशीट दायर की जाएगी। अदालत ने फरार चल रहे आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी कर दिए हैं। इनमें शराब कारोबारी अरविंद सिंगला, खलिंदर सिंह कादियान, अशोक अरोड़ा, सौरव गुप्ता, शेखर व दलजीत सिंह शामिल हैं।
चंडीगढ़ पुलिस ने दो मार्च को संजीव महाजन को गिरफ्तार इस पूरे मामले का खुलासा किया था। पुलिस के मुताबिक संजीव महाजन व उसके साथियों ने सेक्टर-37 की कोठी पर कब्जा करने के लिए उसके मालिक राहुल मेहता को प्रताड़ित किया। बंधक बनाया। फिर गुजरात के भुज स्थित एक आश्रम में छोड़ दिया। इसके बाद दलजीत सिंह को नकली राहुल मेहता बनाकर आरोपियों ने कोठी की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली।
पुलिस ने जांच के बाद इस मामले में सेक्टर-39 थाने के पूर्व एसएचओ राजदीप सिंह को भी गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप था कि जब वह थाने का इंचार्ज था तो उसके पास कोठी पर कब्जा करने की शिकायत आई थी, लेकिन राजदीप सिंह ने शिकायतकर्ता को थाने से भगा दिया था। इसके अलावा शिकायत को फाड़कर पीड़ित पक्ष को धमकाया भी था।
इस मामले में गठित एसआईटी ने जांच में पाया कि राजदीप सिंह को इस मामले की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद वह आरोपियों के साथ मिलकर पीड़ित पक्ष को धमकाता रहा। उसके बाद एसआईटी ने राजदीप को गिरफ्तार कर लिया था। जेल में बंद सभी आरोपियों की ओर से जिला अदालत में जमानत याचिका डाली गई, लेकिन कोई राहत नहीं मिली।