कांग्रेस हाईकमान ने तमाम सस्पेंस पर विराम लगाते हुए चमकौर साहिब से विधायक चरनजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस विधायक दल का नेता बना दिया है। यह पद पिछले दिनों सुनील जाखड़ के इस्तीफे के बाद खाली हुआ था। प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के समय से ही चन्नी का नाम सीएलपी लीडर की दौड़ में सबसे आगे चल रहा था।
आखिर शुक्रवार को पार्टी ने इस पर फैसला कर लिया। राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब के प्रभारी शकील अहमद ने इसकी पुष्टि की है। इस बार पंजाब में सीएलपी का डिप्टी लीडर भी नियुक्त किया गया है। यह जिम्मेदारी लुधियाना पश्चिम के विधायक भारत भूषण आशू को दी गई है।
इससे पहले पंजाब में एक-दो बार ही डिप्टी लीडर नियुक्त किया गया है। वहीं, सुल्तानपुर लोधी से विधायक नवतेज चीमा को चीफ व्हिप बनाया गया है। पार्टी ने सीएलपी लीडर जैसे सूबे के दूसरे अहम पद पर चन्नी को नियुक्त कर दलित कार्ड खेला है ताकि अगले विधानसभा चुनाव में दलित वोट बैंक को पार्टी से जोड़ा जा सके।
चन्नी 2007 के विधानसभा चुनाव में चमकौर साहिब से टिकट के दावेदार थे, लेकिन पार्टी से टिकट न मिलने पर वह बगावत करके आजाद चुनाव लड़े और पहली बार विधायक बने थे। उसके बाद वह अकाली सरकार के साथ ही चलते रहे।
बाद में मनप्रीत बादल से हाथ मिला लिया। दिसंबर 2010 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के दोबारा प्रदेश कांग्रेस प्रधान बनने के बाद चन्नी ने कांग्रेस में वापसी की थी। 2012 के विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट पर लड़कर दूसरी बार विधायक बने। चन्नी विधानसभा में काफी मुखर रहे हैं।
इससे पहले वह दो बार खरड़ नगर काउंसिल के प्रधान भी रह चुके हैं। प्रश्नकाल के दौरान और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए उन्होंने दलितों से जुड़े कई अहम मुद्दे सदन में उठाए हैं। वह प्रखर वक्ता हैं और अपने हलके में उनकी मजबूत पकड़ है। उधर, आशू और चीमा भी 2012 के विधानसभा चुनाव में पहली बार जीत कर सदन में पहुंचे हैं।
गौरतलब है कि पिछले दिनों नेतृत्व में बदलाव के तहत प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा और सीएलपी लीडर सुनील जाखड़ ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद केंद्रीय ऑब्जर्वरों ने विधायकों से सीएलपी लीडर पर राय ली थी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह फैसला किया है।