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चंडीगढ़: नाखून और होठों का रंग बदले तो हो जाएं सावाधान, हो सकती है ओमिक्रॉन संक्रमण की शुरुआत

Thu, 13 Jan 2022 10:33 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मौजूदा समय में फैल रहे संक्रमण में त्वचा की टोन के आधार पर पीली, ग्रे या नीले रंग की त्वचा, होंठ या नाखून के रंग में बदलाव ओमिक्रॉन के कारण हो सकते हैं।
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नाखूनों के रंग में बदलाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना की तीसरी लहर में अगर संक्रमण के लक्षण नहीं दिख रहे हैं, लेकिन होंठ और नाखून के रंगों में बदलाव आ रहा है तो सचेत हो जाइए। क्योंकि यह कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के संक्रमण का शुरुआती दौर हो सकता है। नाखून और होंठों के रंग में बदलाव दिखाई देते ही तत्काल खुद को आइसोलेट कर लें। क्योंकि जांच में भले ही संक्रमण की पुष्टि न हो, लेकिन आपके शरीर में संक्रमण पहुंच चुका है। 

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अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट ने संक्रमण की इस नई स्थिति के बारे में लोगों को आगाह करते हुए गाइडलाइन भी जारी कर दी है। चिंता की बात यह है कि संक्रमण से पहले होंठ और नाखून के रंग में बदलाव की शिकायत संबंधी परेशानी लेकर मरीज त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने लगे हैं। 

नेशनल स्किन हॉस्पिटल पंचकूला के संचालक व अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट के अंतरराष्ट्रीय फेलो डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि मौजूदा समय में फैल रहे संक्रमण में त्वचा की टोन के आधार पर पीली, ग्रे या नीले रंग की त्वचा, होंठ या नाखून के रंग में बदलाव ओमिक्रॉन के कारण हो सकते हैं, इसलिए यह गौर करने की बात है कि यदि आपके नाखून का रंग नीला या भूरा हो रहा हो तो बिना देरी किए तत्काल विशेषज्ञ से सलाह लें क्योंकि यह ओमिक्रॉन संक्रमण का शुरुआती लक्षण हो सकता है। चिंता की बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण के दौरान ज्यादातर मरीजों की कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है, लेकिन उससे संक्रमण का खतरा बरकरार है, इसलिए समय रहते लक्षणों को पहचान कर खुद को आइसोलेट कर लें, ताकि खुद की स्थिति गंभीर होने से बचाने के साथ ही अपनों को भी संक्रमण की जद में आने से रोका जा सके। 

ऑक्सीजन की कमी का है परिणाम

डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट ने ओमिक्रॉन के कारण त्वचा पर होने वाले दुष्प्रभाव के प्रति लोगों को आगाह करते हुए नई गाइडलाइन भी जारी कर दी है। गाइडलाइन के अनुसार हमारी त्वचा के रंग का पीला, धूसर या नीले रंग का होना, नाखून के रंग में बदलाव आना, होंठ के रंग का नीला या दूसरे कलर में परिवर्तित होना इस बात को पुष्ट करता है कि हमारे शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो रही है, जिससे त्वचा की कोशिकाओं में ऑक्सीजन का संचार अवरोधित होने पर रंग में बदलाव आने लगता है। 

संक्रमण के लक्षण

सांस लेने में तकलीफ, सीने में लगातार दर्द या दबाव, घबराहट, नींद न आना, गले में खराश, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, सर्दी, सिरदर्द, थकान, छींक आना, रात में पसीना आना, शरीर में दर्द, आंखों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते आना आदि। 

कोरोना की तीनों लहरों में त्वचा पर ये लक्षण आए हैं सामने

पहली लहर : पैरों की उंगलियों में सूजन (कोविड टोज)

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दूसरी लहर : जीभ में सूजन और लाल चकत्ते (कोविड टंग)
तीसरी लहर : नाखून और होंठ के रंग में बदलाव (कोविड नेल एंड लिप्स)

कोरोना की पहली और दूसरी लहर की तरह तीसरी लहर में भी त्वचा पर अलग-अलग लक्षण और दुष्प्रभाव दिखाई देने लगे हैं। शुरुआती दौर में ही लक्षणों को पहचान कर सही इलाज शुरू कर दिया जाए, क्योंकि स्थिति गंभीर होने पर समस्या को पूरी तरह से दूर करना संभव नहीं हो पाता। -डॉ. विकास शर्मा, अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट के अंतरराष्ट्रीय फेलो

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