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Chandigarh News: अब शिक्षा का सुपरहब बनेगा चंडीगढ़

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सारंगपुर में 150 एकड़ पर विकसित होगी एडुसिटी, मास्टर प्लान-2031 के ड्राफ्ट में बड़े बदलाव
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माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। चंडीगढ़ अब केवल शहर ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के बड़े एजुकेशन हब के रूप में भी नई पहचान बनाने की तैयारी में है। मास्टर प्लान-2031 के ड्राफ्ट संशोधनों में सारंगपुर में 150 एकड़ जमीन पर आधुनिक एडुसिटी विकसित करने का रोडमैप तैयार किया गया है। यूटी प्रशासन ने इस परियोजना के लिए ग्राउंड कवरेज 40 प्रतिशत और फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) 1.50 से बढ़ाकर 2.50 करने का प्रस्ताव रखा है जिससे सीमित भूमि पर ज्यादा शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा सकेगा। नए प्रावधानों के तहत यहां आधुनिक अकादमिक ब्लॉक, हॉस्टल, रिसर्च सेंटर और मल्टीस्टोरी एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का रास्ता खुलेगा।
इन बदलावों के बाद चंडीगढ़ आने वाले वर्षों में कोटा, दिल्ली और मुंबई जैसे स्थापित शिक्षा केंद्रों को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच सकता है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी इसे शहर के विकास की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं। सारंगपुर की 150 एकड़ जमीन को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। पहले चरण में 75 एकड़ भूमि निजी संस्थानों के लिए आरक्षित रखने की योजना है। इसके तहत निजी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, प्रोफेशनल ट्रेनिंग सेंटर और कोचिंग संस्थान यहां अपना इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर सकेंगे। प्रशासन के मुताबिक इससे न केवल शिक्षा क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ेगा बल्कि शहर में रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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सारंगपुर, धनास और मनीमाजरा बनेंगे नए एजुकेशन जोन
मास्टर प्लान-2031 के ड्राफ्ट में केवल एडुसिटी परियोजना ही नहीं बल्कि सारंगपुर, धनास और मनीमाजरा को भी शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने का रोडमैप तैयार किया गया है। इन क्षेत्रों में निजी कोचिंग सेंटर, स्कूल, ट्रेनिंग संस्थान और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। ड्राफ्ट में इन क्षेत्रों के लिए अधिकतम ग्राउंड कवरेज 40 प्रतिशत और एफएआर 2.50 प्रस्तावित किया गया है। वहीं भवनों की अधिकतम ऊंचाई 30 मीटर यानी करीब 98 फीट 5 इंच तक रखने का प्रस्ताव है। फ्लोरों की संख्या अनुमेय (निर्धारित अधिकतम ऊंचाई) ऊंचाई और एफएआर के अनुसार तय होगी। पार्किंग व्यवस्था को भी नए सिरे से डिजाइन किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार हर 100 वर्गमीटर कवर एरिया पर 2 ईसीएस पार्किंग अनिवार्य होगी ताकि भविष्य में ट्रैफिक और पार्किंग दबाव को नियंत्रित किया जा सके।

स्कूलों और कॉलेजों को भी बड़ी राहत
मास्टर प्लान-2031 के ड्राफ्ट में शहर के मौजूदा स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी विकास मानकों में व्यापक बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। प्रशासन ने पहली बार शैक्षणिक परिसरों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विस्तार देने का रास्ता खोला है। नए प्रस्ताव के तहत स्कूलों और कॉलेजों में अधिकतम ग्राउंड कवरेज 40 प्रतिशत तक किया जाएगा। स्कूलों के लिए एफएआर 1.5 और कॉलेजों के लिए 2.0 प्रस्तावित है। इसके अलावा हॉस्टल विकसित करने वाले संस्थानों को कुल अनुमेय एफएआर का 25 प्रतिशत अतिरिक्त उपयोग करने की अनुमति भी मिलेगी। इस बदलाव से संस्थानों को अतिरिक्त क्लासरूम, रिसर्च ब्लॉक, लाइब्रेरी, लैब और छात्रावास विकसित करने में आसानी होगी। प्रशासन के मुताबिक इससे विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी और बाहरी राज्यों से आने वाले छात्रों को भी बेहतर आवासीय व्यवस्था मिल सकेगी।
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बदलेगा स्कूल और कॉलेजों का इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल
ड्राफ्ट में स्कूल और कॉलेज भवनों की ऊंचाई सीमा भी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। स्कूल भवनों की अधिकतम ऊंचाई 17.52 मीटर (57 फीट 6 इंच), कॉलेज भवनों की 25.48 मीटर (83 फीट 7 इंच) और हॉस्टल भवनों की 22.63 मीटर तक निर्धारित करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा प्राथमिक स्कूलों में प्रति 100 वर्गमीटर कवर एरिया पर 0.75 ईसीएस पार्किंग, सेकेंडरी और हाई स्कूलों में 1 ईसीएस और कॉलेज परिसरों में 2 ईसीएस पार्किंग अनिवार्य करने की तैयारी है। ड्राफ्ट में हर संस्थान में दो मुख्य गेट और दो विकेट गेट की अनुमति देने का सुझाव भी शामिल है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 44 मीटर × 22 मीटर आकार के मल्टीपर्पज स्पोर्ट्स हॉल विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर 14 वर्गमीटर तक के सिक्योरिटी केबिन या चेक पोस्ट बनाने की अनुमति होगी, जिसे एफएआर में शामिल नहीं किया जाएगा।


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