चंडीगढ़ में इस बार जनवरी का महीना बारिश न होने के कारण काफी गर्म रहा। फरवरी का महीना भी इसी तरह गर्म रह सकता है। बीता वर्ष 44 साल में सबसे अधिक गर्म रिकॉर्ड किया गया है। साल 2016 की शुरुआत भी कुछ इसी ढंग से हुई है। जनवरी का औसत अधिकतम तापमान 7 वर्षों में सबसे अधिक रिकॉर्ड किया गया है।
मौसम विभाग की मानें तो फरवरी के अधिकतर दिन गर्म रहने के पूरे आसार हैं। फरवरी के पहले 11 दिन तो मौसम ठंडा रहेगा। छह व सात फरवरी को बादल छाने के आसार हैं। 12 फरवरी के बाद तापमान सामान्य से ऊपर जाएगा। तापमान अधिक होने का प्रभाव फसलों के साथ पानी से होने वाली बीमारियों पर भी पड़ेगा।
मौसम विभाग के डायरेक्टर का कहना है कि सर्दी में गर्मी का एहसास होने के पीछे मुख्य कारण बारिश का न होना है। ‘एल-नीनो’ का असर होने से पूरे उत्तर भारत में बारिश काफी कम हुई है।
6 साल में जनवरी सबसे गर्म
इस वर्ष जनवरी का महीना छह वर्षों में सबसे गर्म रिकॉर्ड किया गया है। जनवरी का औसत तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। जनवरी में मात्र चार दिन अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रहा है। जबकि बाकी दिन तापमान सामान्य से अधिक रिकॉर्ड किया गया है। इसी तरह रात का भी तापमान अधिक रहा है। रात का औसत तापमान 7.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है।
फरवरी में ऐसा रहेगा मौसम
चंडीगढ़ मौसम विभाग के मुताबिक पांच फरवरी तक दिन और रात का तापमान चढ़ेगा। छह व सात फरवरी को पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव हो रहा है। इससे दो दिन बादल छा सकते हैं। 11 फरवरी तक दिन और रात के तापमान में थोड़ी गिरावट आएगी। 12 फरवरी के बाद फिर से तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। 12 से 25 फरवरी तक तापमान सामान्य से अधिक रहेगा।
इसलिए तापमान रहा ज्यादा
मौसम विभाग के मुताबिक इस समय एल-नीनो का असर है। इससे पश्चिमी विक्षोभ पर काफी फर्क पड़ा है। इस कारण बारिश न के बराबर हुई है। एल-नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्य क्षेत्र की उस समुद्री घटना का नाम है, जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित इक्वाडोर व पेरु देशों के तटीय समुद्री जल में कुछ वर्षों के अंतराल पर घटित होती है। इससे समुद्र के सतही जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है।
जब समुद्र का सतही जल अधिक गर्म होने लगता है तो वह सतह पर ही रहता है। वह समुद्र के नीचे का पानी ऊपर आने के प्राकृतिक क्रम में रुकावट पैदा करता है। इसकी हवाओं की दिशा बदलने, कमजोर पड़ने, सतही जल के ताप में बढ़ोतरी करने में अहम भूमिका होती है। इससे ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में कम और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में बारिश अधिक ज्यादा होती है। मार्च तक इसका असर खत्म हो जाएगा।
बढ़ते तापमान का असर
बढ़ते तापमान का असर सबसे ज्यादा फसलों पर पड़ने वाला है। तापमान अधिक होने से गेहूं समय से पहले पक जाएगा। इससे दाने का साइज छोटा हो सकता है। तापमान बढ़ने का असर बीमारियों पर ज्यादा पड़ेगा। क्यूलेक्स मच्छरों के लारवा मिलने शुरू हो चुके हैं, जो काफी चिंताजनक है। पीजीआई के पैरासिटोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी आर सहगल के मुताबिक अगर यही हालात रहे तो एडीज मच्छरों की ब्रीडिंग इस बार फरवरी के अंत तक शुरू हो जाएगी।