टूटी सड़के, वाहनों से भरे पार्क, कूड़े की बदबू और झूलते तार। कुछ ऐसी है चंडीगढ़ में सेक्टर 17 से मात्र छह किलोमीटर दूर इस बसे मलोया की पहचान। इस एरिया को देखकर बिलकुल नहीं लगता है कि यह प्लान सिटी चंडीगढ़ का हिस्सा है।
विकास का भेदभाव साफ तौर पर दिखता है। शहर के सेक्टरों की जो सड़कें बिना टूटे ही बना करती हैं, वहीं मलोया में सड़क टूटने के सालों बाद भी कोई सुध नहीं लेता। मलोया के लोगों का कहना है कि उनके इलाके के साथ भेदभाव हो रहा है। जितना ध्यान सेक्टरों व वीआईपी सेक्टरों में ध्यान दिया जाता है, उतना ध्यान इन इलाकों में नहीं दिया जाता।
पार्क बने पर सड़क पर खेलने को मजबूर
मलोया में आधा दर्जन से ज्यादा पार्क होंगे। सभी पार्कों में वाहनों ने अड्डा जमा रखा है। खेलने और मार्निंग वॉक की कोई जगह नहीं है। सौंदर्यीकरण भी नाममात्र का है। इस वजह से लोग पार्क में नहीं जाते। लंबी-लंबी घास खड़ी हैं। मेंटीनेंस के नाम पर गंभीरता है। इलाके के लोग भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
खंभों पर बिजली के तारों का झुंड
मलोया में बिजली के खंभों पर तारों का झुंड है। खुले तार होने की वजह से आए दिन शॉट सार्किंट
की वजह से बिजली गुल रहती है। खंभों की हालत ऐसी है कि वह कभी भी गिर सकते हैं। ट्रांसफार्मर ओवरलोड है। गर्मी बढ़ते ही बिजली गुल हो जाती है। शहर के सेक्टरों में बिजली के तारों को अंडरग्राउंड की योजना है तो यहां पर खुले और पुराने तारों की सुध नहीं ली जा रही।
बदबूदार नाले ने किया दुश्वार
चंडीगढ़ का गांव मलोया
भारत सरकार का स्वच्छा अभियान यहां दम तोड़ता दिखता है। स्नेहालय से मलोया में एंट्री करने पर बीच में ही खुले में बहता गंदा-बदबूदार नाले ने इलाके के लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। नाले की बदबू से हर कोई परेशान है। बस स्टैंड व मार्केट में कूड़े के ढेर आसानी से दिख जाते हैं। कूड़े को जलाने की घटना आम है। एंट्री प्वाइंट पर भी कूड़े के ढेर हैं।
टूटी सड़कें बनी हादसों का कारण
मलोया और कॉलोनी की सड़कों की हालत बड़ी दयनीय स्थिति में है। टूटी सड़कों के कंकरीट हादसों के कारण बन रहे हैं। रोजाना कोई न कोई बाइक सवार गिरता ही है। कई बार लोगों ने टूटी सड़कों की शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली।
आंगनबाड़ी में कांग्रेस घास का घेरा
मलोया बस स्टैंड के पास बने आंगनबाड़ी केंद्र में कांग्रेस घास फैली हुई है। आंगनबाड़ी के मैदान में कई बार सांप निकल चुका है। बच्चों के लिए बना खेल का मैदान भी बदहाली का शिकार है। बच्चे आते हैं और सिर्फ भोजन लेकर चलते बनते। कोई भी वहां बैठने को तैयार नहीं होता।
मलोया द्वार पर बना बड़ा सरोवर बरबादी के कगार पर-
चंडीगढ़ का गांव मलोया
मलोया के एंट्री प्वाइंट पर काफी साल पहले एक तालाब बनाकर सरोवर का निर्माण किया गया था। ताकि खूबसूरती बढ़ाई जाए। लेकिन उदासीनता की वजह से अब सिर्फ सूखा तालाब बचा है। लोगों के कहने पर कई बार काम शुरू कराया गया। कुछ दिन काम होता और फिर बंद हो जाता है।
सीवरेज लीकेज आम समस्या
यहां की सबसे बड़ी समस्या सीवरेज लीकेज की है। सीवरेज का पानी घर के बाहर बहता रहता है। शिकायत करने के हफ्ते भर बाद समस्या ठीक होती है। तब तक लोगों को सीवरेज की बदबू से दो-चार होना पड़ता है। सीवरेज के ढक्कन भी बेहतरतीब तरीके से रखे हैं। हादसे की एक वजह यह भी है।
25 हजार की आबादी में एक भी ई-संपर्क सेंटर नहीं-
मलोया की कुल आबादी करीब 25 हजार है। इसके बावजूद एक भी ई संपर्क सेंटर नहीं है। लोगों को काम के लिए डड्डूमाजरा में जाना पड़ता है। उनका आरोप है कि डड्डूमाजरा में दो ई संपर्क बनाए जा चुके हैं। मलोया के बारे में कई बार बात उठी, लेकिन मुद्दा वहीं का वहीं रह गया।
स्कूल में पानी की सप्लाई नहीं
ऐसा माना जाता है कि चंडीगढ़ में पानी की सप्लाई बहुत अच्छी है। लेकिन मलोया के एक स्कूल में पिछले डेढ़ साल से पानी की सप्लाई बाधित है। नगर निगम का टैंकर रोजाना आता है और उससे पानी की सप्लाई होती है। इसके बावजूद पानी की सप्लाई से बच्चों को काफी परेशानी आती है।