चंडीगढ़ यूटी प्रशासन पिछले कई वर्षों से शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की बात कर रहा है लेकिन खुद पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां खरीद रहा है। एक आरटीआई के जवाब में रजिस्टरिंग एवं लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) ने बताया है कि पिछले चार वर्ष में प्रशासन ने 1014 गाड़ियां खरीदीं हैं लेकिन इनमें इलेक्ट्रिक वाहन न के बराबर हैं।
देश में कई राज्यों की सरकारों ने सरकारी बेड़े की गाड़ियों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना भी शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने एक जनवरी 2022 से इस पर काम शुरू कर दिया है। यहां की सरकार जरूरत के अनुसार इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद व किराए पर ले रही है। दिल्ली सरकार लीज पर संचालित होने वाले मौजूदा वाहनों (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील कर रही है। चंडीगढ़ में प्रदूषण मुक्त ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) ने सीएनजी ऑटो को परमिट देना बंद कर दिया है। अब सिर्फ ई-ऑटो को शहर में सवारियों को ढोने के लिए परमिट दिए जा रहे हैं। साथ ही शहर में चल रहे करीब 6500 सीएनसी-एलपीजी ऑटो को भी धीरे-धीरे ई-रिक्शा और ई-ऑटो से बदलने की तैयारी है। यूटी प्रशासन का फोकस ई-बसों के साथ ई-टू व्हीलर और थ्री-व्हीलर पर भी है लेकिन सरकारी दफ्तरों में अभी भी वाहनों को ईवी में बदलना शुरू नहीं हुआ है।