स्टेट हाईवे डी नोटिफाई करने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट में यूटी प्रशासन ने जवाब सौंप दिया। प्रशासन ने कहा कि 2005 में हाईवे इसलिए नोटिफाई किए गए थे ताकि इन सड़कों का सही विकास हो सके और अब जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के चलते 99 में से 84 ठेके बंद हो रहे हैं तो हाईवे डी नोटिफाई करने का निर्णय ले लिया गया है। हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए पूछा है कि आखिर हाईवे की परिभाषा क्या है और किस आधार और शक्ति से इसे नोटिफाई और डी नोटिफाई किया जाता है।
मंगलवार को प्रशासन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के चलते नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर क्षेत्र में शराब के ठेके अवैध हो गए हैं। शहर के अधिकतर रोड सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से कवर हो जाते हैं। ऐसे में शहर में मौजूद 99 में से केवल 84 ठेके ही बच पाएंगे।
प्रशासन ने दलील दी कि ठेके बंद होने से प्रशासन को राजस्व का भारी नुकसान होगा। प्रशासन की मुख्य दलील थी कि चंडीगढ़ यूटी है और सड़कों को स्टेट हाईवे का दर्जा इसलिए दिया गया ताकि इनकें विकास और मरम्मत के लिए उचित फंड्स मिलते रहें। इस पर हाई कोर्ट ने प्रशासन से पूछा की किस आधार पर किसी सड़क को स्टेट हाइवे घोषित किया जाता है।