सबको मालूम है कि पीजीआई में आपरेशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। किसी विभाग की छह महीने की वेटिंग हैं तो किसी की तीन महीने। पीजीआई अकसर दावा करता है कि मरीजों की भीड़ ज्यादा है, इसलिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, लेकिन इन दावों से दूर एक वजह यह भी है कि पीजीआई के नौ ओटी (आपरेशन थिएटर) किसी काम के नहीं हैं। इन ओटी टेबल पर आपरेशन नहीं किए जाते हैं। इनमें से तो एक ओटी को महीने में एक बार या फिर दो महीने में एक बार आपरेशन के लिए खोला जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये ओटी काम करने लगें तो आपरेशन के वेटिंग काफी गिर सकती है। ये ओटी पिछले कई महीनों से बंद हैं। इन्हें खुलवाने के लिए कोई भी कारगर प्रयास नहीं किए गए हैं। पीजीआई प्रशासन भी इससे अंजान है। यदि पीजीआई प्रशासन इसके लिए गंभीर हो तो मरीजों की काफी बड़ी समस्या हल हो सकती है।
यहां-यहां बंद चल रहे हैं ओटी
एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर : छठे फ्लोर पर चार आपरेशन टेबल हैं। तीन चल रहे हैं, चौथा टेबल उद्घाटन के दिनों से ही बंद है। बताया गया है कि चौथे टेबल के लिए न तो सामान है और न ही मैन पावर है।
रोबोटिक सेंटर : इसका भी एक टेबल बंद है। यहां भी मैनपावर नहीं है। बाकी सामान के होने का दावा किया जा रहा है।
इमरजेंसी का ओटी : इमरजेंसी का ओटी नंबर सात बंद चल रहा है। इसकी लाइटें खराब हैं। यहां होने वाले आपरेशन दूसरी ओटी में शिफ्ट किए जा रहे।
ट्रामा 22 का ओटी : इसमें तीन टेबल हैं। दो काम करते हैं, जबकि एक नहीं। यहां पर भी स्टाफ की कमी है।
डे केयर सेंटर : ओपीडी में पांच डे केयर सेंटर हैं। यहां पर छोटी-छोटी सर्जरी की जा सकती है। लेकिन सामान और स्टाफ की वजह से सभी ठप चल रहे हैं।
लीवर ट्रांसप्लांट ओटी : यह ओटी तभी खुलता है जब लीवर ट्रांसप्लांट होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका प्रयोग दूसरे आपरेशन के लिए हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा।