हर महीने 3500 रुपये ज्यादा आ रहा बिल
सरकारी कर्मी होने की वजह से अधिकतर लोग खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं लेकिन उन्होंने बताया कि नियमों में ही गड़बड़ी है। साफ नहीं है कि उपभोक्ता को कितने साल तक चार्ज देना होगा या किसी हादसे या खराबी पर जिम्मेदारी किसकी होगी। अधिकारियों ने बिना किसी सार्वजनिक चर्चा के अपने हिसाब से नियम बना दिए हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन घरों पर प्लांट नहीं है वहां भी चार्ज वसूला जा रहा है। सेक्टर-27 के रहने वाले संजय कुमार के घर पर चार महीने से सोलर प्लांट नहीं है, फिर भी बिल में हर महीने करीब 3500 रुपये सोलर यूजर चार्जेस जोड़े जा रहे हैं। ये कैसे नियम हैं कि प्लांट खराब है तो भी चार्ज दो और प्लांट ही न हो तो भी उपभोक्ता को देना पड़े। वह 2022 से ही सीजीआरएफ में सोलर यूजर चार्जेस हटाने के लिए केस भी लड़ रहे हैं।
लोग लिखकर दे रहे- घर के छत से सोलर प्लांट हटाओ
इस मनमानी के खिलाफ अब लोग खुलकर आवाज उठा रहे हैं। अब तक 42 उपभोक्ता उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (सीजीआरएफ) में केस दर्ज कर चुके हैं और विभाग तक सैकड़ों शिकायतें पहुंच चुकी हैं। कई उपभोक्ता विभाग को लिखकर दे चुके हैं कि वे अपने घरों से सोलर प्लांट हटवाना चाहते हैं। आरोप यह भी है कि सोलर से बनने वाली बिजली का फायदा उपभोक्ता को नहीं बल्कि कंपनी और प्रशासन को मिल रहा है और यूजर चार्जेस के जरिये कमाई की जा रही है। प्लांट में लगे डिवाइस भी उपभोक्ता के मीटर से बिजली खींचते हैं जिससे खपत और बिल दोनों बढ़ते हैं।
2019 में रेट हुए थे तय, तब से वसूली जारी
19 दिसंबर 2019 को तत्कालीन वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें पहले तय 250 रुपये प्रति किलोवाट के बजाय 300 रुपये प्रति किलोवाट प्रति माह की दर से सोलर यूजर चार्ज उपभोक्ताओं के बिजली बिल के साथ वसूला जाना तय किया गया था। इसमें तत्कालीन विशेष सचिव वित्त विनोद पी कावले, तत्कालीन चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद, तत्कालीन एसई (बिजली) सीडी सांगवान, तत्कालीन एक्सईएन यूके पटेल और तत्कालीन एफएंडपीओ अश्विनी डोगरा मौजूद थे। दरों के अनुसार 1 किलोवाट क्षमता के लिए 300 रुपये प्रतिमाह यानी दो महीने के लिए 600 रुपये, 2 किलोवाट पर 1200 रुपये, 3 किलोवाट पर 1800 रुपये और 4 किलोवाट पर 2400 रुपये देने पड़ रहे हैं।
केस - 1
सेक्टर-16डी में रहने वाले एक व्यक्ति के घर के सितंबर माह का बिजली बिल 8976 रुपये आया है। इसमें बिजली की खपत महज 1612 रुपये है। इसमें 4800 रुपये संडरी चार्जेस और 2400 रुपये सोलर यूजर चार्जेस जोड़े गए हैं। बाकी अन्य टैक्स अलग से लगाए गए हैं।
केस - 2
सेक्टर-23बी में रहने वाले एक व्यक्ति की बिजली की खपत 1516 रुपये की थी लेकिन 2400 रुपये सोलर यूजर चार्जेस लगाए गए हैं। बाकी अन्य टैक्स भी जोड़े गए हैं। ऐसे में कुल बिल 4113 रुपये का बना है। इन्होंने स्थानीय पार्षद को भी शिकायत की है।
केस - 3
सेक्टर-16 के एक अन्य व्यक्ति जिनका बिजली के पिछले दो बिल 1363 और 2453 रुपये आए थे, सितंबर में अचानक 8003 रुपये हो गया। उन्होंने देखा तो बिल में 2400 रुपये सोलर यूजर चार्जेस व बाकी संडरी चार्जेस जोड़े गए थे। खपत सिर्फ 771 रुपये की थी। उन्होंने लिखित में विभाग को सोलर प्लांट हटाने की मांग की है।