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दिनभर सूरज ने बढ़ाई तपिश, बारिश से गिरा शहर का पारा, काम आएंगे गर्मी से बचने के ये उपाय

Thu, 28 May 2020 02:15 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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- फोटो : अमर उजाला
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बुधवार देर शाम गर्म हवाओं के साथ हल्की बारिश से मौसम का मिजाज बदल गया। तेज हवाओं के बीच गरज के साथ हुई बारिश से शहर के लोगों को गर्मी से राहत मिली। इससे 42.9 डिग्री पहुंचे पारे में एक डिग्री गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार अब चार दिन तक मौसम में बदलाव होता रहेगा। 

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तेज हवाएं चलने के साथ चंडीगढ़ और आसपास इलाके में बारिश होगी। बता दें कि 25 मई से नौ तपा शुरू होने के बाद से चंडीगढ़ के अधिकतम तापमान में 4 डिग्री का उछाल आ गया था। बुधवार को शहर का अधिकतम तापमान 42.9 डिग्री तक पहुंच गया। इसके बाद दिन भर पूर्वी गर्म हवाएं चलीं। हालांकि, हल्की बारिश आधे घंटे तक ही चली।  


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मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि पूर्व की ओर से गर्म हवाओं के चलने से यह बारिश हुई। आज से मौसम में बदलाव देखने को मिलेंगे। हवाओं के साथ हल्की बूंदाबांदी 31 मई तक हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आएगी।  

पांच साल में 27 मई सबसे गर्म 
साल 2020 में 27 मई पिछले पांच साल में सबसे गर्म रहा। मौसम विभाग के अनुसार 2015 में 27 मई को 42 डिग्री पारा पहुंच गया था, जिसके बाद 2016 में 41.2, 2017 में 39.1, 2018 में 41.7 और 2019 में 39.9 अधिकतम तापमान रहा।

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गर्मी के मौसम में न खाएं बासी खाना

मई का अंतिम सप्ताह चल रहा है। गर्मी का प्रकोप शुरू हो गया। कोरोना महामारी का प्रकोप पिछले दो महीने से हम भुगत ही रहे हैं। ग्रीष्मकाल में जठराग्नि मंद हो जाती है और पाचन शक्ति निर्बल। इससे शरीर को पोषक तत्व नहीं मिल पाते। गर्मी में बासी खाने से बचना चाहिए। गर्मी से बचने के लिए तरल और पानी युक्त प्रदार्थों का सेवन करना चाहिए। यह कहना है गांधी स्मारक भवन स्थित प्राकृतिक चिकित्सा विभाग के डायरेक्टर डॉ. देवराज त्यागी का। 

उन्होंने कहा कि गर्मी में यदि आहार विहार के पालन में परहेज न किया जाए तो बीमार पड़ते देर नहीं लगती। इन दिनों में हमें ताजा मौसमी फल व हरी सब्जी खानी चाहिए। भोजन के बाद कच्चे सलाद के रूप में ककड़ी, हरा धनिया, टमाटर, पत्ता गोभी, प्याज, पुदीना, तरबूजा, खरबूजा, परवल, तरोई, छिलके वाली मूंग दाल आदि खाना चाहिए, क्योंकि इन सब में जल की मात्रा अधिक होती है।

दोपहर में नींबू पानी का शिकंजी बेहतर 
दोपहर में नींबू पानी का शिकंजी पीना चाहिए। आम का पना बनाकर पीना चाहिए। यह चीजें लू से बचाती हैं। दिन भर में आठ से दस गिलास पानी पीना चाहिए एक बार में एक गिलास पानी ही पीना चाहिए। पानी फ्रिज का न होकर घड़े का होना चाहिए। ग्रीष्मऋतु में जल्दी उठना, वायु सेवन के लिए घूमने जाना, ठंडे जल से स्नान करना, शीतल वातावरण में रहना तथा चबा-चबाकर भोजन करना चाहिए। ग्रीष्मऋतु में मिट्टी के बहुत फायदे हैं। मिट्टी शरीर के लिए अति गुणकारी वस्तु है। मिट्टी से शरीर के अनेक विकार दूर होते है। मिट्टी अपने अंदर सारी गंदगी सोख लेती है।

मिट्टी का लेप भी लाभदायक
विश्वभर के सारे प्राकृतिक चिकित्सा मिट्टी का प्रयोग अनेक तरह से करते हैं। सबसे शुद्ध रोग नाशक मिट्टी दो तीन फुट गहरे गड्डे से निकली हुई होती है। इस मिट्टी को 12 घंटे पहले भिगो देना चाहिए। मिट्टी का प्रयोग शरीर पर मिट्टी लेप तथा मिट्टी की पट्टी के तौर पर किया जाता है। मिट्टी की पट्टी तथा लेप से कई तरह की बिमारियां दूर होती है। 

जैसे कब्ज की बीमारी में मिट्टी की पट्टी खाली पेट पेडू पर लगभग 30 मिनट रखनी चाहिए। इससे कब्ज दूर होता है। पाचन शक्ति ठीक होने लगती है। सिर दर्द, आंखों के रोग व कमजोरी, खुजली, फोडे-फुन्सी, एक्जिमा, बल्डप्रेशर व अनिद्रा में बहुत लाभ मिलता है। मिट्टी लेप से शरीर की सारी गर्मी निकल जाती है तथा शरीर का संतुलन ठीक हो जाता है। मिट्टी लेप से त्वचा के रोम कूप खुल जाते है। जिसमें शरीर को अच्छी वायु मिलती है।
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