चंडीगढ़। कोरोना के खिलाफ जारी जंग में टीकाकरण अभियान को रफ्तार देने के लिए पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों की सरकार ने ग्लोबल टेंडर की ओर कदम बढ़ा दिए हैं, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन का अभी ऐसा कोई इरादा नहीं। यूटी प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा ने स्पष्ट रूप से कहा कि अभी हम केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेशों का इंतजार करेंगे।
शहर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर की वजह से अस्पतालों में बेड फुल हैं। मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। केंद्र ने तीसरी लहर की भी चेतावनी दी है। प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा का भी कहना है कि तीसरी लहर से बचने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र रास्ता है लेकिन वैक्सीन की कमी की वजह से अभियान की रफ्तार भी धीमी पड़ती जा रही है। प्रशासन ने युवाओं को टीका लगवाने के लिए एक लाख डोज की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने सिर्फ 32210 वैक्सीन ही चंडीगढ़ को सौंपी हैं, जबकि शहर में 14 वर्ष से 45 वर्ष के युवाओं की संख्या करीब 3.75 लाख है। ऐसे में 32,210 वैक्सीन, महामारी के दौर में ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
बीते दिनों वैक्सीन की मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को दुनिया के बाजार से वैक्सीन खरीदने की मंजूरी दे दी थी। इसके बाद यूपी, ओडिशा समेत कई राज्यों ने ग्लोबल टेंडर लगा दिया और अब पंजाब और हरियाणा भी ग्लोबल टेंडर लगाने जा रहे हैं। इस मामले पर मनोज परिदा का कहना है कि चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है, ऐसे में चंडीगढ़ द्वारा ग्लोबल टेंडर किया जाएगा या नहीं, यह केंद्रीय गृह मंत्रालय ही तय करेगा।
ग्लोबल टेंडर क्या होता है?
ग्लोबल टेंडर दुनिया भर के देशों की कंपनियों के लिए जारी किया जाने वाला एक टेंडर होता है। इस टेंडर को संबंधित विभाग अपनी बेवसाइट पर या फिर प्रतिष्ठित राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मीडिया के द्वारा जारी करता है। साथ ही इसे वैश्विक टेंडर से संबंधित कई वेबसाइट्स पर भी जारी किया जाता है। ग्लोबल टेंडर इसलिए जारी किया जाता है ताकि खरीद की प्रक्रिया पारदर्शी हो और सभी को मौका दिया जा सके। इस टेंडर प्रणाली के जरिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भी आमंत्रित किया जाता है कि वो माल की सप्लाई के लिए बोली लगाएं। वहीं, इसमें जिस कंपनी की बोली सबसे किफायती होती है, उसे इसका ठेका दे दिया जाता है।