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आ रहे हैं राम: बेटे के साथ कार सेवा करने गई थीं निर्मला शर्मा, टुंडला में हो गई थी गिरफ्तार... बताई आपबीती

Mon, 15 Jan 2024 04:24 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

1990 में 55 साल की निर्मला शर्मा ने अयोध्या में कारसेवा में बेटे दीपक के साथ हिस्सा लिया था। वे बताती हैं कि चंडीगढ़ से 124 कार सेवकों की अलग अलग टोली बनाई गई थी। महिलाओं की एक टोली की प्रमुख उन्हें बनाया गया था। 
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निर्मला शर्मा और दीपक - फोटो : संवाद
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विस्तार
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चंडीगढ़ सेक्टर 51 निवासी निर्मला शर्मा ने 1990 में अयोध्या में कारसेवा में हिस्सा लिया था। निर्मला बताती हैं कि अयोध्या कार सेवा के लिए जाते हुए टुंडला रेलवे स्टेशन पर बेटे दीपक के साथ गिरफ्तार हो गई थी। आज भी उस दिन को याद कर मन हर्षित हो जाता है। उस समय मेरी आयु 55 वर्ष थी। चंडीगढ़ से 124 कार सेवकों की अलग अलग टोली बनाई गई थी। महिलाओं की एक टोली की प्रमुख मुझे बनाया गया था। 
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अन्य महिला टोली की प्रमुख डॉ. सुमन और बहन प्रेम गुप्ता थी। युवा टोली के प्रमुख अश्विनी महाजन, चंद्र शेखर, सुरिंद्र और दीपक शर्मा थे।

सभी टोलियों के प्रमुख वकील स्वर्गीय राजेंद्र मित्तल थे। उनके साथ अन्य प्रमुख लोग में ज्ञानचंद गुप्ता, सत्य पाल जैन, स्वर्गीय विजय गुप्ता थे। हम सभी को कहा गया था कि जैसे ही पुलिस पकड़ने लगे चुपचाप अपनी अपनी टोली लेकर अलग हो जाएं और अयोध्या की तरफ चल पड़े। सभी अपने ढंग से अयोध्या पहुंचने का प्रयास करें।

चंद्रशेखर को बनाया था नकली दूल्हा...
रेलगाडी में हम सभी एक बरात के रूप में यात्रा कर रहे थे। चंद्रशेखर को नकली दूल्हा बना रखा था। जैसे ही हमारी गाड़ी टूंडला स्टेशन पहुंची तो एक नंबर प्लेटफार्म की बजाय सुनसान प्लेटफार्म नंबर चार पर रुकी। हमारे डिब्बे के चारों दरवाजे पुलिस ने घेर लिए। हालात को देखते हुए राजेंद्र मित्तल ने सभी को गिरफ्तारी देने को कहा। सभी कार सेवक राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे के नारे लगाने लगे।
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कुछ लोग आगे आ कर कार सेवकों के पांव छूने की भी कोशिश करने लगे। इसी आपाधापी में कुछ कार सेवकों ने पुलिस के घेरे से भागने की कोशिश की लेकिन रेलवे स्टेशन के गेट से पहले ही फिर पुलिस ने पकड़ लिया। इस दौरान दो कार सेवक चोटिल भी हो गए थे।

हम सभी को पुलिस के एक घेरे में एक नंबर प्लेटफार्म मे ले जाया गया जहां पहले से एक मजिस्ट्रेट मौजूद था। सभी को जेल ले जाने का आदेश दिया गया। कारसेवकों को टुंडला के एक सरकारी स्कूल में ले जाया गया जहां पहले से कुछ कारसेवक कैदी रूप में रखे गए थे। हमारे साथ चल रहे वकीलों ने प्रशासन से स्कूल को जेल बनाने के आदेश कापी मांगी। उन्होंने कहा कि क्योंकि हमें जेल ले जाने के आदेश हुआ है इसलिए केवल जेल लेकर जाएं।

उसके बाद हम सभी को आगरा जेल ले जाने के लिए बसों का प्रबंध किया गया। लेकिन जब तक हम आगरा जेल पहुंचते शाम हो गई थी। जेल का मुख्य द्वार बंद हो गया था। इसलिए एक रात के लिए हम सभी कार सेवकों को आगरा के एक आर्य समाज मंदिर ले जाया गया।

कार सेवक पुलिस के घेरे में चलते हुए जिस भी गली सड़क से गुजरते, जय श्री राम का घोष सुनते ही आस पास के लोग भी जय श्रीराम का घोष लगाने लगते। बहुत स्थान पर फल की रेहड़ी लगाने वाले लोगों ने अपनी रेहड़ी से फल उठा कर कार सेवकों को दिए। एक दुकानदार अपनी दुकान से टाफियां लाकर कार सेवकों को देने लगा। ऐसा लग रहा था कि सब बस राम में ही समा गया है।

आर्यसमाज मंदिर में सुबह का नाश्ता करने के बाद हमें आगरा जेल ले जाया गया। मंदिर में नाश्ता उसी गली के लोगों के घरों में बना था और उनका ही आग्रह था कि कार सेवकों को नाश्ते के बाद जेल ले जाया जाए।

जेल में खराब खाना मिला...
आगरा जेल में पहली रात हम सभी को आम कैदियों के साथ रखा गया। रात को जो भोजन दिया गया वह बहुत ही खराब था। खाने योग्य भी न था। अगली सुबह सभी कार सेवकों ने सत्याग्रह शुरू कर अच्छे खाने की और रहने की व्यवस्था की मांग की

उस समय उसी जेल में कुख्यात डाकू मलखान सिंह भी बंद था। उसकी अन्य कैदियों पर और जेल प्रशासन पर बहुत धाक थी। वह भी राम भक्त कार सेवकों के साथ सत्याग्रह करने के लिए तैयार हो गया। 

जेल प्रशासन ने शाम होते होते जेल प्रांगण में तंबू लगा कर कार सेवकों के रहने की अलग व्यवस्था की।खाने के लिए आगरा शहर के राम भक्तों को जेल में खाना पहुंचाने का अनुरोध किया तब से हमारे जेल रहने तक आगरा शहर के कुछ राम भक्त सदैव जेल के बाहर खडे़ रहते यह जानने के लिए कि कार सेवकों को कुछ चाहिए तो नहीं। जेल में भी कीर्तन चला। जल्दी ही जेल प्रशासन ने हमारे कहने पर रामचरित मानस का प्रबंध कर दिया।

छठे दिन हमें सूचना मिली कि अयोध्या में कार सेवकों पर गोली चली। जिसमें बड़ी संख्या में कार सेवक शहीद हो गए। उस घटना के बाद संगठन ने कार सेवा का कार्यक्रम टाल दिया। सभी कार सेवकों को अपने अपने घर लौटने को कहा। अगले ही दिन हम सभी को पुलिस की निगरानी में बसों में बैठाकर कर दिल्ली बस अड्डे छोड़ दिया गया।

पेंशन का पैसा खर्च करना बंद किया...
निर्मला शर्मा का कहना है कि जब से प्रभु राम का मंदिर बनना शुरू हुआ है मैंने अपनी पेंशन में से पैसे खर्च करना बंद कर दिया है। अब 86 वर्ष आयु में बस यही इच्छा है कि जिन कार सेवकों के साथ आगरा जेल में रही, उन के साथ श्री राम के भव्य मंदिर में रामलला के दर्शन करने जाऊं। दीपक शर्मा ने बताया कि मन में बहुत खुशी है कि अपने जीते जी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को देख सकेंगे।
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