चंडीगढ़। राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाजी और तीरंदाजी की चैंपियनशिप की मेजबानी रद्द होने से शहर के खिलाड़ियाें, एसोसिएशन के साथ इन दोनों खेलों से जुड़े कोच भी सकते में हैं। कोरोना के चलते इन दोनों खेलों की मेजबानी रद्द करने को इन कोचों ने शहर के लिए एक सुनहरा मौका गंवाना बताया।
भारतीय निशानेबाजी टीम के साथ जुड़े हुए कोच और शहर के सेक्टर-15 निवासी डीएस चंदेल ने कहा कि यह बड़ा झटका है। हमने सेक्टर-25 में निशानेबाजी रेंज के लिए काफी तैयारी की हुई थी। इन दोनों खेलों की चैंपियनशिप अगर चंडीगढ़ में होती तो विश्व के बेहतरीन खिलाड़ियाें ने यहां पहुंचना था। ट्राइसिटी और इसके आसपास के निशानेबाजी के खिलाड़ियों को खेलते हुए देखने का मौका हाथ से निकल गया।
वहीं, 2014 से 2017 तक शहर के सुखना लेक स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में तीरंदाजी सेंटर में कोच रही पूर्व ओलंपियन सुमंगला का कहना है कि अगर राष्ट्रमंडल खेल होते तो अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को देखकर हमारे खिलाड़ियों को आत्मविश्वास बढ़ता। 2004 एथेंस ओलंपिक में तीरंदाजी में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली सुमंगला का कहना है कि यह एक बड़ा नुकसान है। अगर तीरंदाजी का खेल होता तो चंडीगढ़ में तीरंदाजी का ग्राफ बढ़ता। शहर तीरंदबाजी में काफी अच्छा कर रहा है। पूर्व ओलंपियन सुमंगला इन दिनों साई के सोनीपत सेंटर में तैनात हैं।