शुक्रवार को शहर में पुलिस के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से चिंतित पुलिस ने शनिवार को राजनीतिक दलों पर दबाव बनाया कि वे ऐसे प्रदर्शन न करें।
इसकी कमान खुद एसएसपी और एसएसपी आपरेशन ने संभाली। राजनीतिक दलों को यह आश्वासन भी दिया गया कि जांच में तेजी लाई जाएगी।
एसएसपी डॉ. सुखचैन सिंह गिल और एसएसपी ऑपरेशन आरएस घुम्मन ने शनिवार को कांग्रेस, भाजपा और बसपा के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं।
पुलिस विभाग शहर में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर काफी चितिंत है। इसलिए शनिवार को पुलिस विभाग के एसएसपी आपरेंशन आरएस घुम्मन और एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल ने कांग्रेस, भाजपा और बसपा के नेताओं के साथ अलग अलग बैठकें की।
बैठक में एसएसपी ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों और जांच में कोई देरी नहीं बरती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों से शहर का माहौल शांत रखने के लिए सहयोग मांगा।
बसपा नेताओं ने इस पूरे मामले को स्वतंत्र एजेंसी से करवाने की मांग की। कांग्रेसी नेताओं के साथ हुई बैठक में हरमेल केसरी, पवन शर्मा, एचएस लकी, दवेंद्र बबला, शशिशंकर तिवारी ने भाग लिया।
इसी तरह भाजपा के नेता प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन के नेतृत्व में आए। इनमें रघुबीर लाल अरोड़ा, प्रेम कौशिक, सचिव इन्द्रजीत काला, रेनू बाला, रेनू चौधरी, शिंगारा सिंह, पार्षद हीरा नेगी, रजिन्द्र कौर रत्तू, श्री सतिन्द्र सिंह, डॉ. एपी संवारिया, कैलाश चंद जैन, गुरप्रीत सिंह ढिल्लो आदि शामिल थे।
एसएसपी के बुलावे पर शनिवार को बसपा की ओर से जन्नत जहां, पार्टी संयोजक हाफिज अनवर उल हक, मुख्य महासचिव संजीव बब्बर, सलीम खान, मलकीत सिंह, बृजपाल, सूर्यप्रकाश, तरसेम लाल अत्री बैठक में पहुंचे।
बैठक में पार्टियों की पुलिस से मांग
भाजपा
- पुलिस के ऐसे कौन से लोग थे जो पीड़िता को एक आरोपी कांस्टेबल से शादी के लिए मजबूर कर रहे थे।
- जब पीड़िता के बयान थाने में दर्ज किए गए तो उस समय आरोपी सामने क्यों मौजूद थे।
- मेडिकल में सात से आठ घंटे की देरी क्यों की गई। इस बीच पीड़िता को भूखा क्यों रखा गया।
- इस दौरान पुलिस के किसी भी आला अधिकारी ने पीड़िता का हाल जानने और मदद की कोशिश क्यों नहीं की।
- पीसीआर का जीपीएस से पिछले एक महीने का रिकार्ड निकाल कर उसकी जांच की जाए।
- क्या पीसीआर पर कोई महिला कांस्टेबल तैनात नहीं थी अगर थी तो उसने पुलिस को क्यों सूचित नहीं किया।
- पीसीआर के हेड कांस्टेबल को तुरन्त निलम्बित किया जाए। वह भी इस घटना का उतना ही जिम्मेदार है जितने पांच आरोपी कांस्टेबल।
- ट्रैफिक पुलिस की तरह ही पुलिस में भी मार्शल नियुक्त किए जाएं।
कंग्रेस
-इंस्पेक्टर सुच्चा सिंह हत्याकांड की तर्ज पर जल्द से जल्द चालान पेश किया।
-फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर चार से पांच माह में सजा सुनाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
- मौली जागरा में नया थाना बनाया जाए।
-सीमावर्ती इलाकों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई जाए।
बसपा
-नवनियुक्त पुलिस जवानों को जनता के साथ दोस्ताना व्यवहार की ट्रैनिंग दी जाए।
-सभी स्कूलों में शिकायत पेटी रखनी चाहिए, ताकि कोई छात्रा इसके माध्यम से अपनी शिकायत दे सके।
-सभी थानों और पीसीआर में महिला कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
-पीड़ित लड़की और उसके परिजनों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए और मुआवजा दिया जाए।