चंडीगढ़ पुलिस ने चर्चित एमबीए छात्रा हत्याकांड मामले को 14 साल बाद सुलझा लिया है। वर्षों तक पुलिस इस मामले में हाथ पैर मारती रही लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। वर्ष 2020 में तो पुलिस ने इस केस में अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। लेकिन जांच चलती रही और आखिरकार एक डीएनए रिपोर्ट ने आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही दो और मामले भी सुलझ गए।
क्या था मामला
30 जुलाई 2010 को सेक्टर-38 वेस्ट में दुष्कर्म के बाद एमबीए छात्रा की हत्या कर दी गई थी। छात्रा इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स के लिए ट्यूशन जाती थी। 30 जुलाई 2010 को जब वह रात करीब 9 बजे तक ट्यूशन से घर नहीं लौटी तो पिता ने बेटी की तलाश शुरू की। उन्होंने उसकी सहेलियों से संपर्क किया लेकिन कुछ पता नहीं चला। अगले दिन सुबह छात्रा का शव मलोया थाना क्षेत्र में सड़क किनारे झाड़ियों में मिला। छात्रा की एक्टिवा सड़क किनारे खड़ी थी जबकि मोबाइल गायब था। पुलिस ने मलोया थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया।
न आधार कार्ड बनवाया न स्मार्ट फोन लिया
एमबीए की छात्रा का हत्यारोपी मोनू इतना शातिर है कि वह शहर में होते हुए 14 साल तक पुलिस को घुमाता रहा। पुलिस से बचने के लिए उसने न तो अपना आधार कार्ड बनवाया और न ही कभी स्मार्टफोन का इस्तेमाल किया। आधार कार्ड न होने से उसके फिंगर प्रिंट भी मैच नहीं हुए। यही वजह है कि वारदात स्थल से 500 मीटर की दूरी पर रहते हुए भी इतने समय तक वह पुलिस की पकड़ से दूर रहा।
कई बार चढ़ु पुलिस के हत्थे
पुलिस ने उसे चोरी व झपटमारी के मामलों में कई बार गिरफ्तार भी किया और वह सलाखों के पीछे भी रहा, लेकिन उसने कभी भी एमबीए छात्रा या दूसरी महिला से दुष्कर्म और हत्या का खुलासा नहीं किया। दोनों हत्याओं की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने करीब 800 लोगों को पूछताछ की। इनमें आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों के साथ ट्राइसिटी के ऑटो चालक, टैक्सी ड्राइवर, रेहड़ी-फड़ी व किराए के मकानों में रहने वाले कुंवारे लड़कों को भी शामिल किया गया। इनमें से संदिग्ध लोगों के ब्लड सैंपल लिए। इसके लिए कुछ ब्लड डोनेशन कैंप भी लगवाए गए। ब्लड सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए लेकिन सभी रिपोर्ट निगेटिव आई।
पुलिस ने एमबीए छात्रा के चार दोस्तों में बितेश, सचिन, हितेश, सागर और एक अन्य का गांधीनगर सीएफएसएल लैब में नार्को व ब्रेन मैपिंग टेस्ट भी करवाया लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आने पर सभी को क्लीन चिट दे दी गई। दो अन्य दोस्तों कुनाल और सनेश के सैंपल भी जांच के लिए सीएफएसएल भेजे गए लेकिन सफलता नहीं मिली।
पुलिस ने मलोया में दूसरी महिला की हत्या के वक्त घटनास्थल पर मिले फिंगर प्रिंट को जांच के लिए एनसीआरबी की फिंगर प्रिंट लैब में भेजा लेकिन आरोपी के फिंगर प्रिंट पुलिस के रिकॉर्ड में नहीं होने के चलते मैच नहीं हुए। वहीं, एमबीए छात्रा के मोबाइल पर मिले निशान भी पुलिस रिकॉर्ड से मैच नहीं हुए।
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसने कभी आधार कार्ड नहीं बनवाया क्योंकि उसे डर था कि इससे उसकी पहचान उजागर हो जाएगी और वह पकड़ा जाएगा। इसके अलावा आरोपी ने कभी स्मार्ट फोन भी नहीं खरीदा। वह बटन वाला मोबाइल इस्तेमाल करता था और उसे भी वह भी बार-बार बदलता रहता था। आरोपी नशे का भी आदी है।
सैंपल लेने गई पुलिस तो बहाना बनाकर भागने लगा
आरोपी मोनू रक्तदान शिविर में भी शामिल नहीं हुआ था। जुलाई 2023 में मलोया थाना पुलिस मोनू के घर ब्लड सैंपल लेने गई तो वह वॉशरूम जाने का बहाना बनाकर भागने लगा लेकिन पुलिस ने उसे दबोच लिया और उसके सैंपल ले लिए। इसके बाद वह बेफिक्र होकर घूमने लगा।
रोने लगे मृतका के पिता, कहा-खत्म हो चुकी थी आस
आरोपी के पकड़े जाने के बाद जब एमबीए छात्रा के पिता से बात की गई तो वह बेटी को याद कर रोने लगे। कहा कि उन्होंने तो आरोपी के पकड़े जाने की आस ही खो दी थी। उन्हें तो उम्मीद भी नहीं थी कि पुलिस 14 साल बाद उनकी बेटी के साथ दरिदंगी कर उसकी हत्या करने वाले को पकड़ लेगी। हां, अब उम्मीद है कि मेरी बेटी को इंसाफ मिलेगा।
चंबा (हिमाचल प्रदेश) में आरोपी के खिलाफ 19 सितंबर 2008 को युवती से दुष्कर्म और उसकी हत्या का केस दर्ज हुआ था। करीब 18 महीने तक हिमाचल की कोर्ट में ट्रायल चला लेकिन गवाहों के बयान व सबूतों के अभाव में आरोपी मोनू बरी हो गया था। बुधवार को जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंची तो उसने अपनी मां से कहा कि उसे एक बार अपने हाथ से बनी रोटी खिला दे। वहीं, जब मृत एमबीए छात्रा के पिता थाने पहुंचे तो आरोपी उनके सामने हाथ जोड़कर अपनी घिनौनी हरकत के लिए उनसे माफी मांगने लगा।
सीएफएसएल के एक्सपर्ट ने पुलिस को दिए थे अहम सुराग
दोनों हत्याओं को सुलझाने में सीएफएसएल के एक्सपर्ट ने पुलिस को अहम सुराग दिए थे। दोनों हत्याकांड के बाद मौके से साक्ष्य जुटाने वाले सीएफएसएल के इस एक्सपर्ट ने यूटी पुलिस को बता दिया था कि दोनों हत्याएं एक ही व्यक्ति ने की हैं। उन्होंने पुलिस के सामने कुछ अहम सुराग भी रखे। इसके बाद पुलिस ने सीरियल किलर के एंगल से दोनों हत्याओं की जांच शुरू की और मलोया क्षेत्र में ऐसे लोगों की तलाश शुरू की जो आपराधिक वारदातों में शामिल थे।