रिश्वत के मामलों में चंडीगढ़ यूटी पुलिस विभाग की अपने मुलाजिमों पर होने वाली कार्रवाई सवालों के घेरे में है। एक ओर जहां हाल ही में आर्थिक अपराध शाखा के दो सब-इंस्पेक्टरों पर सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार मामला दर्ज करते ही विभाग ने उन्हें तुरंत ही निलंबित कर बर्खास्त कर दिया था। वहीं दूसरी ओर विभाग में एक ऐसा कांस्टेबल सेवा में है जिसे सीबीआई अदालत ने 31 जनवरी को 10 हजार रुपये रिश्वत मामले में चार वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
एसएसपी दफ्तर से 31 अगस्त, 2023 को एक आदेश जारी हुए थे, जिसमें कांस्टेबल दिलबाज सिंह को पीसीआर यूनिट में तत्काल प्रभाव से ड्यूटी ज्वाइन करने के आदेश दिए गए थे। जारी आदेशों में कहा गया था कि पीसीआर के डीएसपी इस संबंध में विशेष विस्तृत रिपोर्ट तत्काल भेजेंगे। एसएसपी कंवरदीप कौर ने यह आदेश जारी किए थे।
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सेक्टर 34 थाने के पूर्व प्रभारी राजेश शुक्ला समेत थाने में कार्यरत रहे कांस्टेबल दिलबाज सिंह समेत एक हैड कांस्टेबल मुकेश के खिलाफ सीबीआई ने 3 सितंबर, 2014 को भ्रष्टाचार निरोधक कानून और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में मामला दर्ज किया था। दिलबाज को चार वर्ष की कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा हुई थी। आरोपी हेड कांस्टेबल मुकेश को अदालत ने बरी कर दिया था। वहीं सजा सुनाए जाने से पहले ही ट्रायल के दौरान शुक्ला की मौत हो गई थी। सजा पाने वाला दिलबाज सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ उसके अपील केस में हाईकोर्ट से सजा निलंबित कर दी थी। वह जनवरी में सजा होने पर कुछ समय जेल भी रहा था।
यह है मामला
दिलबाज ने 34 थाने का कांस्टेबल रहते हुए 10 हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। यह रिश्वत शिकायतकर्ता ठेकेदार ललित जोशी को पार्किंग ठेका चलाने देने और उसे झूठे केस में न फंसाने के लिए 2 सितंबर को अपने और राजेश शुक्ला के नाम पर मांगी गई थी। शिकायतकर्ता को कहा गया था कि पार्किंग चलाने के लिए उसे हर महीने पांच हजार रुपये देने होंगे। 3 सितंबर को उसने शुक्ला के नाम पर यह रिश्वत हासिल की। उसने अपने पद का दुरुप्रयोग करते हुए भ्रष्ट या गैर-कानूनी तरीके से 10 हजार रुपये का लाभ लिया था। ऐसे में उसे भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दोषी करार दिया था। 31 जनवरी को उसे सजा सुनाई गई थी।
हाल ही में विभाग इन पर गिरा चुका है गाज
- ईओडब्ल्यू के दो एसआई हुसैन अख्तर और कृष्ण कुमार को पांच लाख रुपये रिश्वत केस में गिरफ्तारी के बाद नौकरी से बर्खास्त किया गया था।
- सेक्टर 39 थाने के अतिरिक्त एसआई नवीन फोगाट पर एक व्यापारी से एक करोड़ रुपये वसूली मामले में केस दर्ज होने पर उसे बर्खास्त किया गया।
- हरियाणा में शराब तस्करी के आरोप में मामला दर्ज होने पर सेक्टर 26 थाने और ट्रैफिक में तैनात दो कांस्टेबल अनिल कुमार और रविंदर सिंह निकाले गए।
- इनके अलावा सीबीआई अदालत से भ्रष्टाचार मामलों में दोषी करार होने पर एएसआई दविंदर शर्मा, एसआई सुशील कुमार, एसआई नवीन कुमार, एसआई अरविंद कुमार, हवलदार दलबीर सिंह, हवलदार राम निवास और कांस्टेबल मांगे राम को बर्खास्त कर दिया गया था।
सीबीआई मुकद्दमे झेल रहे इन अफसरों को राहत
चंडीगढ़ में भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी के मामलों में लंबे समय से निलंबित चार पुलिसकर्मियों को पुलिस विभाग ने सितंबर में बहाल कर दिया था। इनमें सेक्टर-37 के चर्चित कोठी कांड के आरोपी सेक्टर-39 थाने के पूर्व प्रभारी इंस्पेक्टर राजदीप सिंह, पांच लाख की रिश्वत लेने के मामले में आरोपी मनीमाजरा थाने की पूर्व प्रभारी जसविंदर कौर, 10 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुईं सब-इंस्पेक्टर सर्बजीत कौर और 10 हजार रुपये रिश्वत के एक मामले में आरोपी एएसआई हरभजन लाल शामिल हैं। जारी आदेशों में कहा गया था कि इनके केस का मूल्यांकन करने वाली कमेटी की सिफारिश के आधार पर इन्हें बहाल किया गया है।
कांस्टेबल दिलबाज के खिलाफ दो विभागीय जांच लंबित हैं जिन पर कार्रवाई जारी है। इन जांच के नतीजों पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। वह गैर-हाजिर चल रहा था जिसके बाद उसकी पीसीआर में ड्यूटी ज्वाईन करवाई गई थी।
- कंवरदीप कौर, एसएसपी, चंडीगढ़ पुलिस।