पुलिस विभाग जल्द ही शहर के सभी डीएसपी स्तर के अधिकारियों का तबादला करने जा रहा है। हर डीएसपी को नई जिम्मेवारी देने की तैयारी की जा रही है।
ऐसी संभावना जताई जा रही है इसी माह में तबादलों का आर्डर विभाग द्वारा हो जाएगा। इसकी सूचना चंद डीएसपी को भी मिल गई है, जिस कारण प्राइम तैनाती पाने के लिए उन्होंने आला अधिकारियों के पास लाबिंग भी शुरू कर दी है।
इस समय कई डीएसपी ऐसे हैं जिन्हें एक ही जगह तैनात हुए 3 साल से ज्यादा समय हो गया है। जबकि सीवीसी की गाइडलाइन के अनुसार एक अधिकारी 3 साल से ज्यादा समय तक एक पद पर तैनात नहीं हो सकता।
इसके साथ ही नए एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल की ओर से भी इस समय हर डीएसपी की कार्यक्षमता को देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि कार्यक्षमता और कारगुजारी को देखते हुए तबादलों की सूची जारी की जाएगी।
23 डीएसपी हैं इस समय
इस समय शहर में 23 डीएसपी हैं जबकि शहर में सुरक्षा के लिए 11 थानें हैं। विभाग के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है जब इतनी तादाद में डीएसपी तैनात हुए हों।
थानों की निगरानी चाहते हैं अधिकतर
अधिकतर डीएसपी थानों की निगरानी चाहते हैं। इस समय शहर में डीएसपी सेंट्रल, साउथ और ईस्ट का पद है जिस पर हर किसी की नजर है क्योंकि इन डीएसपी को ही अपने अपने थानों की निगरानी करने का मौका मिलता है। लोगों से भी इन डीएसपी का सीधा संपर्क होता है।
अंजिता को नहीं मिली जिम्मेवारी
दिल्ली से आई डीएसपी अंजिता चंदियाल को दो सप्ताह होने वाले हैं, लेकिन उन्हें अभी तक कोई जिम्मेवारी नहीं दी गई है।
तबादलों की नई सूची जारी होने के बाद ही उन्हें पद मिलेगा। ऐसा माना जा रहा है कि उन्हें अहम पद दिया जा सकता है। श्वेता चौहान और सतीश कुमार को इस समय क्राइम ब्रांच में तैनात किया है। तबादलों में इन्हें भी स्वतंत्र विभाग दिया जाएगा।
हर कोई चाहता है एसपी बनना
इस समय चंडीगढ़ के डीएसपी जगबीर, सतबीर, विजय कुमार, रोशन लाल, अश्वनी, बीएस चड्ढा और बीएस नेगी हैं। इनमें हर डीएसपी प्रमोशन पा कर एसपी बनना चाहता है।
इनमें हर अधिकारी प्रशासन को एसपी बनाने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेज चुका है। ध्यान रहे कि शहर में एसपी का कोई पद ही नहीं है।
इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों का तबादला दूसरे राज्यों में
फासवेक अध्यक्ष पीसी सांघी का कहना है कि दूसरे राज्यों से तो डीएसपी स्तर के अधिकारी डेपूटेंशन पर आ रहे है लेकिन शहर में काफी लंबे समय से तैनात डीएसपी दूसरे राज्यों में डेपूटेशन पर नहीं जा रहे है। उनका कहना है कि इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को भी दूसरे राज्यों में भेजने और यहां पर लाने का प्रावाधान होना चाहिए।