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पांच ऐसे बड़े हाई प्रोफाइल केस, जो अभी तक अनसुलझे हैं, चंडीगढ़ पुलिस नहीं ढूंढ पाई सुराग

Mon, 10 Jun 2019 03:44 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ पुलिस पीसीआर - फोटो : डेमो फोटो
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चंडीगढ़ पुलिस को सबसे ज्यादा हाईटेक माना जाता है। इसकी वजह है पीसीआर समेत चीता स्कवायड जो दिन-रात गश्त करती रहती है। पिछले कुछ समय से शहर के अलग-अलग हिस्सों में कई बड़ी वारदातों ने पुलिस को झकझोर कर रख दिया है। इनमें से कई मामलों में तो पुलिस ने कामयाबी हासिल कर अपनी पीठ थपथपाई है, जबकि सेक्टर-22 करण ज्वैलर्स में लूट, सेक्टर-33 में कोल्ड स्टोर के मालिक अजीत जैन के परिवार को बंधक बनाकर डेढ़ करोड़ रुपये के गहनों की लूटपाट, सेक्टर-44 में डायमंड ज्वैलरी शोरूम के मालिक से गन प्वाइंट पर तीन करोड़ की ज्वैलरी लूट, सेक्टर-9 में क्रिकेटर हरभजन सिंह के घर में दो ताले जड़ना समेत इंडस्ट्रियल एरिया के जंगल में मर्डर के हाई प्रोफाइल केस को सुलझाने में पुलिस पूरी तरह फेल साबित हुई है।
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करण ज्वैलर्स में लूट  
केस-1 : 4 अगस्त, 2014 को सेक्टर-22 में करण ज्वैलर्स के सेल्समैन परमजीत सिंह को एक बदमाश दिनदहाड़े गोली मारकर करीब बारह लाख रुपये के गहने लूटकर फरार हो गया था। सारी वारदात सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई। पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। शोरूम के अलावा मार्केट में अन्य जगहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को अच्छी तरह खंगाला गया।

आरोपी की पहचान के लिए पुलिस ने हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली समेत अन्य राज्य में लुटेरे की फोटो भेजीं। बाद में आरोपी का सुराग बताने वाले को 75 हजार रुपये इनाम भी रखा दिया गया। करीब पांच वर्ष बीतने के बावजूद आरोपी की पहचान नहीं हो पाई। करण ज्वैलर्स के मालिक लखविंदर ठाकुर बताते हैं कि शुरुआत के दिनों में पुलिस काफी हद तक आरोपी की तलाश में जुटी रही। अब पुलिस की ओर से कोई रिस्पांस नहीं मिलता है।
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परिवार को बंधक बनाकर लूटे डेढ़ करोड़

केस-2 : सेक्टर-33 में 9 जनवरी, 2018 की रात सैंट्रो कार में चार नकाबपोश लुटेरे कोल्ड स्टोर के मालिक अजीत जैन की पत्नी, बेटी और नौकर को बंधक बनाकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये के गहने व कैश लूटकर फरार हो गए थे। सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों की काले रंग की सैंट्रो कार कैद हो गई लेकिन अंधेरा होने के चलते कार का नंबर क्लीयर नहीं हो सका। पुलिस ने ट्राइसिटी में काले रंग की सैंट्रो कार की लिस्ट को भी खंगाला, लेकिन सुराग नहीं लगा। शक अजीत जैन के ड्राइवर अविनाश यादव (48) पर भी था। पुलिस ने उससे पूछताछ की। 18 जनवरी को अविनाश ने बदनामी के डर से अंबाला-कालका रेलवे लाइन ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। जीआरपी ने अजीत जैन के खिलाफ आत्महत्या करने के लिए उकसाने की धाराओं के तहत केस दर्ज किया। अजीत जैन का कहना है कि पुलिस शुरूआती कुछ महीने लगातार जांच करती रही। कई बार मैंने थाने के चक्कर काटे, लेकिन पुलिस अभी तक आरोपियों का सुराग नहीं लगा सकी है। हमेशा डर बना रहता है कि आरोपी कहीं उनके  आसपास तो नहीं हैं। ऐसे में परिवार के सभी सदस्य दहशत में जी रहे हैं।

 

चार फुट गहरे गड्ढे में दबी मिली लाश

केस-3 : 18 जनवरी को इंडस्ट्रियल एरिया के जंगल में चार 4 फुट गहरे गड्ढे में एक शव मिला था। शव के दोनों पैर और एक हाथ मिट्टी में से बाहर निकाला हुआ था। पुलिस ने शव को बाहर निकाला तो उसके सिर पर गहरा जख्म था। मरने वाले की उम्र 35-40 साल थी। पुलिस को आशंका थी कि मृतक इसी एरिया का निवासी है। एरिया में सभी लोगों को फोटो दिखाकर पूछताछ की गई। लेकिन कोई भी उसकी पहचान नहीं कर सका। इंडस्ट्रियल एरिया थाना प्रभारी जेडपी खान की अगुवाई में पुलिस ने शहर के अलग अलग थानों के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश व अन्य राज्य समेत उसी उम्र के लापता लोगों की लिस्ट खंगाली। पुलिस को इससे भी कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई। वारदात के करीब 5 महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक मामला अनसुलझा है।

डायमंड ज्वैलरी शोरूम में लूट
केस-4 :
बीते 15 मई को सेक्टर-44सी स्थित दीवा डायमंड ज्वैलर्स के मालिक हर्ष बेदी को गन प्वाइंट पर तीन बदमाश बंधक बनाकर करीब तीन करोड़ के डायमंड व सोने चांदी के गहने लूटकर फरार हो गए। मामला पुलिस तक पहुंचा। शोरूम में लगे सीसीटीवी कैमरों में तीनों आरोपियों की करतूत कैद हो गई। सेक्टर-34 थाना प्रभारी बलदेव कुमार की अगुवाई में कार्रवाई करते हुए आसपास के दुकानदारों समेत ज्वैलरी के शोरूम से काम छोड़ चुके वर्करों से पूछताछ की। साथ ही पुलिस ने दिल्ली, मोहाली, समेत पंचकूला पुलिस से भी संपर्क किया। वहीं, पुलिस ने वारदात स्थल से मोबाइल डंप डाटा उठाया और हाल ही में चंडीगढ़, मोहाली, पटियाला, अंबाला समेत नाभा जेल से रिहा होने वाले आरोपियों की लिस्ट खंगाली है। लेकिन अभी तक आरोपियों का कोई ठोस सुराग नहीं मिला, जिससे पुलिस उन तक पहुंच सके।
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हरभजन के घर में जड़े दो ताले

केस-5 : 18 अक्तूबर, 2018 को क्रिकेटर हरभजन सिंह की चंडीगढ़ सेक्टर-9 स्थित कोठी पर किसी ने दो ताले जड़ दिए थे। शक जताया गया कि कहीं कब्जा करने की कोशिश तो नहीं की गई। मामला चंडीगढ़ एसएसपी दफ्तर तक पहुंचा। टीम गठित कर आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला गया। साथ ही आसपास के लोगों से पूछताछ भी की गई। कोई सुराग नही लग सका कि आखिरकार कोठी में दो ताले किसने जड़े थे। घटना को 8 महीने गुजर चुके हैं लेकिन पुलिस सच्चाई सामने लाने पर नाकामयाब साबित हुई है।

पुलिस में तालमेल की कमी
मुंबई, पंजाब समेत अन्य राज्य में पुलिस के आईटी सिस्टम से चंडीगढ़ का सिस्टम बेहद कमजोर है। कई बार फुटेज में आरोपी का चेहरा या मोबाइल नंबर कैद होने के बावजूद क्लीयर नहीं हो पाता, जिससे आरोपियों की पहचान पुलिस की पहुंच से दूर हो जाती है। दूसरा मुख्य कारण थाना पुलिस और अलग-अलग विंग में आपसी तालमेल की कमी है। इसके अलावा पब्लिक मीटिंग बहुत जरूरी है। इससे आपके सोर्स बनते हैं और अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होती है।   
- जगबीर सिंह, पूर्व डीएसपी चंडीगढ़।
 
मामलों को जल्द सुलझाने की कोशिश जारी
हां, कुछ मामले अनसुलझे हैं। मामलों को जल्द सुलझाने की कोशिश जारी है। बाकी आपको अभी पूछकर बताता हूं।
- चरणजीत सिंह विर्क, डीएसपी, पीआरओ।
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